आर्थिक तंगी, सुविधाओं का अभाव, लेकिन कुछ कर गुजरने की जिद ने रोनाल्डो को बनाया 'फुटबॉल का जादूगर'

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। कहते हैं कि किसी चीज की सही अहमियत उसी इंसान को पता होती है, जिसने वर्षों से उसके लिए इंतजार किया हो। पुर्तगाल के स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। रोनाल्डो का बचपन गरीबी में गुजरा। एक समय ऐसा भी था, जब रोनाल्डो के घर में खाने तक के पैसे नहीं थे। मां दूसरों के घर में काम करती थी। हालांकि, रोनाल्डो हालातों के आगे झुके नहीं, बल्कि इनसे लड़ने का फैसला किया।

बचपन से ही रोनाल्डो ने घर चलाने में अपनी मां की हरसंभव मदद करने की कोशिश की। उनका दाखिला स्कूल में कराया गया, लेकिन एक बार शिक्षक से विवाद होने के बाद उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। रोनाल्डो की फुटबॉल में शुरुआत से ही खास रुचि थी। वह राह चलते किसी भी चीज को उठाकर प्रैक्टिस करने लगे। इस खेल के प्रति उनकी दीवानगी बढ़ती चली गई और 8 साल की उम्र में उन्होंने स्थानीय क्लब एंडोरिन्हा से खेलना शुरू कर दिया। इसके बाद रोनाल्डो पूरी तरह फुटबॉल में रम गए।

12 साल की उम्र में रोनाल्डो को घर से दूर जाना पड़ा और उनका दाखिला स्पोर्टिंग लिस्बन एकेडमी में कराया गया। इस अकादमी में उन्होंने शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को मजबूत बनाया और अपने खेल को भी निखारा। 18 वर्ष की उम्र में रोनाल्डो की मैनचेस्टर यूनाइटेड में एंट्री हुई। क्लब ने इस युवा फुटबॉलर की काबिलियत को देखते हुए उन्हें 17 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदा, और बस यहीं से रोनाल्डो की जिंदगी बदल गई।

कहा जाता है कि स्पोर्टिंग सीपी और मैनचेस्टर यूनाइटेड के बीच हुए दोस्ताना मैच में रोनाल्डो ने अपने बेहतरीन खेल से क्लब के मैनेजर सर एलेक्स फर्ग्यूसन को हैरान कर दिया था। रोनाल्डो को मैनचेस्टर यूनाइटेड में 7 नंबर की जर्सी दी गई। साल 2003 में ही रोनाल्डो ने पुर्तगाल की ओर से कजाकिस्तान के खिलाफ हुए एक मैत्रीपूर्ण इंटरनेशनल मुकाबले में अपना डेब्यू किया। 2004 में हुई यूरोपीय चैंपियनशिप में रोनाल्डो अपने खेल के दम पर लोगों का ध्यान इंटरनेशनल स्तर पर खींचने में सफल रहे।

रोनाल्डो ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैनचेस्टर यूनाइटेड की जर्सी में उनका खेल लगातार निखरता चला गया। साल 2009 में रोनाल्डो को क्लब में शामिल करने के लिए रिकॉर्ड ट्रांसफर फीस चुकाई और लगभग 8 करोड़ यूरो में साइन किया। रियल मैड्रिड के लिए खेलते हुए रोनाल्डो ने अपने करियर के सबसे बेहतरीन पल दिए। अपनी तेज रफ्तार, फुर्ती और शानदार स्किल्स के दम पर उन्होंने पूरी दुनिया को अपने खेल का दीवाना बना दिया।

रोनाल्डो अपने करियर में आधिकारिक तौर पर अब तक लगभग 970 गोल कर चुके हैं। वह पांच बार बैलोन डी'ओर जीत चुके हैं, जबकि 'यूरोपीय गोल्डन शू' पुरस्कार उन्होंने चार बार अपने नाम किया है। अपने करियर में उन्होंने 5 यूईएफए चैंपियंस लीग, 2 स्पेनिश ला लीगा, 3 इंग्लिश प्रीमियर लीग और 2 इटैलियन सीरी-ए समेत 30 से अधिक बड़े खिताब जीते हैं।

साल 2016 में रोनाल्डो ने अपने देश पुर्तगाल को यूईएफए यूरो का खिताब जिताया, जबकि 2019 में उन्होंने अपनी कप्तानी में पुर्तगाल को यूईएफए नेशंस लीग की ट्रॉफी भी दिलाई। रोनाल्डो सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाले पुरुष खिलाड़ी भी हैं। कतर में हुए पिछले फीफा वर्ल्ड कप में पुर्तगाल और रोनाल्डो दोनों का प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा था। टीम क्वार्टर फाइनल में ही हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी। हालांकि, फीफा विश्व कप 2026 को रोनाल्डो के करियर का आखिरी वर्ल्ड कप भी माना जा रहा है, ऐसे में वह पुर्तगाल की जर्सी में ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ विदाई जरूर लेना चाहेंगे।

--आईएएनएस

एसएम/एएस

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