वैश्विक स्तर पर सकारात्मक अपडेट के चलते भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी : एनालिस्ट

मुंबई, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार लगातार छह हफ्तों की गिरावट के बाद बीते हफ्ते सकारात्मक बंद होने में सफल रहे। इसकी वजह वैश्विक बाजारों से समर्थन मिलना था। यह जानकारी एनालिस्ट की ओर से दी गई।

बाजार के सेंटीमेंट में सुधार की वजह अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का अस्थाई सीजफायर होना है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट -रिसर्च, अजीत मिश्रा ने कहा,“घरेलू अर्थव्यवस्था के स्थिर आधार ने इस रैली को और भी मजबूती दी, जिससे व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के मध्य में आई तेज बढ़त और उसके बाद हुई प्रॉफिट बुकिंग के बावजूद, बीते हफ्ते सूचकांकों में तेजी का रुख रहा।”

निफ्टी और सेंसेक्स में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और वे सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब क्रमशः 24,050.60 और 77,550.25 पर बंद हुए।

एनालिस्ट के अनुसार, बीते हफ्ते वैश्विक घटनाक्रम एक प्रमुख कारक बना रहा, अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम से जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार हुआ, हालांकि इसे लेकर अनिश्चितता बनी रही।

दूसरी तरफ, कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर से नीचे की तेज गिरावट ने घरेलू चिंताओं को कम किया और बाजारों में तेजी को सपोर्ट किया।

घरेलू मोर्चे पर, आरबीआई ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा और विकास को समर्थन देने के साथ मुद्रास्फीति के जोखिमों को संतुलित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए तटस्थ रुख अपनाया।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि दर को संशोधित करते हुए 7.6 प्रतिशत कर दिया है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

ऊर्जा की ऊंची कीमतों और संभावित मौसम संबंधी व्यवधानों से उत्पन्न जोखिमों को देखते हुए, केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया गया है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की सक्रियता के कारण समग्र बाजार भावना संतुलित लेकिन सतर्क बनी हुई है।

उनका कहना है कि गिरावट अपेक्षाकृत सीमित प्रतीत होती है, लेकिन तेजी की गति सीमित बनी हुई है, जो एक अनिश्चित और कमजोर आर्थिक सुधार की ओर इशारा करती है।

आर्थिक संकेतकों में नरमी के संकेत मिले हैं, मार्च में सेवा पीएमआई घटकर 57.5 और समग्र पीएमआई घटकर 57.0 हो गया।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक एजेंसियां ​​सकारात्मक बनी हुई हैं, विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और संरचनात्मक कारकों के समर्थन से भारत के विकास दृष्टिकोण को बढ़ाया है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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