वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत की विकास दर वित्त वर्ष 27 में 6.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद : एसबीआई रिसर्च

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था के वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है और यह वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रह सकती है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में सोमवार को दी गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 में भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत पर रहने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि वैश्विक झटकों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्या कांति घोष ने कहा,“कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण ग्रामीण उपभोग मजबूत बना हुआ है। राजकोषीय प्रोत्साहन के समर्थन से, शहरी उपभोग में पिछले त्योहारी सीजन से लगातार वृद्धि देखी जा रही है।”

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) के बैंक ऋण में वित्त वर्ष 2026 में 16.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2025 में 11.0 प्रतिशत थी। कुल ऋण वृद्धि 29.5 लाख करोड़ रुपए रही, जबकि पहली छमाही में यह केवल 5 लाख करोड़ रुपए और दूसरी छमाही में 24.5 लाख करोड़ रुपए थी।

सरकार द्वारा जीएसटी के माध्यम से उपभोग को बढ़ावा देने के कारण वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में ऋण में वृद्धि जारी रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह रुझान अभी भी जारी है और 30 अप्रैल 2026 तक ऋण में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “हालांकि, हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में ऋण वृद्धि मजबूत बनी रहेगी और उच्च आधार प्रभाव के कारण दूसरी छमाही में इसमें गिरावट आएगी। पूरे वर्ष के लिए ऋण वृद्धि 13-14 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”

बाहरी संकटों, विशेषकर पश्चिम एशियाई संकट के बावजूद, घरेलू खपत से जीडीपी वृद्धि में सकारात्मक योगदान मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि से चालू खाता दर में 0.35 प्रतिशत, मुद्रास्फीति में 0.35 से 0.40 प्रतिशत और जीडीपी में 0.20-0.25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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