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प्रयागराज, 4 मई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अब तक 2,200 तकनीकों को विभिन्न उद्योगों को हस्तांतरित कर चुका है।
भारतीय सेना की नॉर्दर्न और सेंट्रल कमांड तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 'नॉर्थ टेक सिम्पोजियम' के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए अनुसंधान पर लगातार ध्यान देना और 'सरप्राइज एलिमेंट' बनाए रखना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, अकादमिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को आवंटित किया गया है और अब तक ये संस्थाएं इस बजट में से 4,500 करोड़ रुपए से अधिक का उपयोग कर चुकी हैं।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में तकनीकी बदलाव की तेज रफ्तार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अब युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और "ऐसे सरप्राइज एलिमेंट सामने आ रहे हैं, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।"
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में महज तीन-चार साल के भीतर युद्ध का स्वरूप टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन और सेंसर-आधारित हो गया। वहीं, रोजमर्रा की चीजें भी घातक हथियारों में बदल रही हैं। लेबनान और सीरिया में पेजर हमलों ने आधुनिक युद्ध के तरीकों पर फिर से विचार करने को मजबूर किया है। ऐसे में हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि देश को ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जिससे जरूरत पड़ने पर दुश्मनों पर अप्रत्याशित हमला किया जा सके।
उन्होंने बताया कि नई 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पॉलिसी' लागू की गई है, जिसके तहत पहले लगने वाली 20 प्रतिशत शुल्क को डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स, डेवलपमेंट पार्टनर्स और प्रोडक्शन एजेंसियों के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों को अपने पेटेंट्स मुफ्त में उपलब्ध कराने की नीति शुरू की है, जिससे उनकी तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत होंगी। इसके अलावा, डीआरडीओ की टेस्टिंग सुविधाएं भी उद्योगों के लिए शुल्क के आधार पर खोल दी गई हैं, जिनका हर साल सैकड़ों कंपनियां अनुसंधान और विकास के लिए उपयोग करती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स, हाइपरसोनिक हथियार, अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए उद्योगों को पूरा समर्थन देगी।
राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को तकनीकी युद्ध और देश की तैयारी का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि इसमें अत्याधुनिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया, जिनमें आकाशतीर, आकाश मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइलें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात भी 38,424 करोड़ रुपए के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स)', 'एसींग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडीईएक्स (एडीआईटीआई)' और 'टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (टीडीएफ)' जैसी पहलें इनोवेशन को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस अवसर पर सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और नॉर्दर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने भी सभा को संबोधित किया।
--आईएएनएस
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