एथिलीन गैस की मात्रा बढ़ने से केले में होते हैं भूरे स्पॉटस

-ऑक्सीजन से रिएक्शन की वजह से कम होता जाता है हरा रंग
bananas-brown spots

लंदन: अमेरिका की फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया है कि केले पर दो-चार दिनों में भूरे निशान या चित्तियां क्यों पड़ते हैं और इसे रोकने का तरीका भी ढूंढा है। वैज्ञानिकों ने खास केलों पर ही ये स्टडी की है क्योंकि दुनिया भर हर साल करीब 50 मिलियन केले सिर्फ इसलिए फेंक दिए जाते हैं, क्योंकि उन पर ये भूरे निशान पड़ जाते हैं। 

ओलिवर नाम के शोधकर्ता ने अपनी स्टडी पर इन्हीं भूरी चित्तियों के बारे में बताया है और दुनिया में कुछ सबसे ज्यादा पैदावार वाली इस फल को बर्बाद होने से रोकने का तरीका भी ढूंढने का दावा किया है।वैज्ञानिकों के मुताबिक केले पर पड़ने वाले भूरे निशान ही इस बात पुष्टि करते हैं कि ये पक चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक केले के छिलके में एथिलीन गैस होती है। यही गैस छिलके में मौजूद क्लोरोफिल को तोड़ती है। क्लोरोफिल ही पत्तियों, छिलकों और तनों के हरे रंग का ज़िम्मेदार होता है। जैसे-जैसे एथिलीन गैस की मात्रा बढ़ती जाती है, ऑक्सीजन से रिएक्शन की वजह से इसका हरा रंग कम होता जाता है और भूरे स्पॉट्स इसकी जगह ले लेते हैं। इसी वक्त केले में मौजूद स्टार्च शुगर में बदल जाता है औ केला मीठा होता जाता है।वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि भूरे स्पॉट का मतलब ये नहीं है कि केला अब इस्तेमाल लायक नहीं बचा। इसे खा भी सकते हैं और बेकरी में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

इस रिसर्च के मुताबिक केलों पर अगर मोम की पतली पर्त चढ़ा दी जाए तो छिलकों का ऑक्सीजन से रिएक्शन नहीं होगा। ऐसे में ये चित्तियां पड़ने की रफ्तार काफी कम हो जाएगी। अगर ये प्रयोग अपनाया जाए तो हर साल करोड़ों टन केले की फसल खराब होने से रोकी जा सकती है। केले के छिलके में मौजूद एथिलीन गैस की वजह से ही अगर आप दूसरे फलों के साथ इसे रखेंगे तो वो भी जल्दी पकने और मुलायम होने लगते हैं।बता दे कि बाज़ार से केले लाने के बाद घर में 2-4 दिन बीतते ही आपने इन पर भूरे रंग के निशान या चित्तियां देखी होंगी। ज्यादातर लोग ऐसे फल को खाने से बचते हैं।


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