छत्तीसगढ़ घटना के बाद फिर सवालों के घेरे में वेदांता ग्रुप, औद्योगिक सुरक्षा प्रथा को लेकर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। देश की दिग्गज खनन कंपनी वेदांता अपने छत्तीसगढ़ प्लांट में बॉयलर ट्यूब फटने की घटना के बाद फिर से सवालों के घेरे में है और इससे कंपनी के औद्योगिक सुरक्षा प्रथा को लेकर चिंताएं खड़ी हो गई हैं।

इस घटना में कम से कम 14 कर्मचारियों की मृत्यू हो गई है और कई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

अनिल अग्रवाल नेतृत्व वाली वेदांता, औद्योगिक सुरक्षा को लेकर होने वाली चर्चाओं में बार-बार सामने आती रही है, क्योंकि इसके खनन, धातु, तेल और गैस और बिजली व्यवसायों में वर्षों से कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की खबरें आती रही हैं।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों के 2010 के संकलन में वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड को 67 मौतों वाली कंपनी के रूप में चिह्नित किया गया था, जो उस समय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध खनन कंपनियों में सबसे अधिक थी।

इसका व्यापक प्रभाव पड़ा और ब्रिटिश सुरक्षा परिषद ने कंपनी और उसकी सहायक कंपनी बाल्को को पहले दिए गए सुरक्षा पुरस्कार को वापस ले लिया।

छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक अन्य बड़ी घटना में चिमनी गिरने से 40 श्रमिकों की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। कंपनी ने इस घटना का कारण खराब मौसम बताया था।

रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में सामने आई जानकारियों से पता चलता है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ है।

वेदांता के सभी परिचालन क्षेत्रों में कार्यस्थल पर होने वाली मौतों की संख्या वित्त वर्ष 2020 में सात से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 13 हो गई, फिर इसमें कुछ कमी आई और वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या फिर से बढ़कर सात हो गई, जिनमें छह श्रमिक और एक कर्मचारी शामिल था।

उद्योग जगत के तुलनात्मक आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि वेदांता उन कंपनियों में से एक है जिनमें अपेक्षाकृत अधिक मौतें हुई हैं।

कंपनी की वित्त वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में कार्यस्थल सुरक्षा से संबंधित आंतरिक शिकायतों में भारी वृद्धि का जिक्र किया है।

वित्त वर्ष 2025 में कर्मचारियों और श्रमिकों ने स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी 1,363 शिकायतें दर्ज कराईं, जो वित्त वर्ष 2024 में दर्ज की गई 603 शिकायतों से दोगुनी से भी अधिक हैं।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए की राशि देने की घोषणा की।

राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिजनों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50,000 रुपए के मुआवजे की घोषणा की। उन्होंने बिलासपुर मंडल के आयुक्त को इस घटना की जांच करने का आदेश भी दिया।

जिला प्रशासन ने भी दुर्घटना की अलग से मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया है। प्रशासन को घायलों के उचित उपचार को सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।

यह दुर्घटना 14 अप्रैल को शक्ति जिले के सिंघानातराई गांव में स्थित कंपनी के प्लांट में हुई, जब एक उच्च दबाव वाले बॉयलर की नली फट गई, जिससे लगभग 600 डिग्री सेल्सियस तापमान वाली अत्यधिक गर्म भाप निकल गई, जिससे कई कर्मचारियों की मौत हो गई।

--आईएएनएस

एबीएस/

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