भारत में अन्य देशों की अपेक्षा न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता कम, सरकार के प्रयासों से विस्तार को मिलेगा बढ़ावा : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। वैश्विक निवेश फर्म मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि देश में रिन्यूएबल एनर्जी में न्यूक्लियर एनर्जी एक रणनीतिक महत्व रखती है, जो जीवाश्म ईंधन की कीमतों में अस्थिरता से प्रभावित हुए बिना स्थिर, कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा प्रदान कर सकती है।

साथ ही कहा कि भारत में न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता 8.2 गीगावाट की है और कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता में इसकी हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत और जेनरेशन में 3 प्रतिशत के आसपास की है। यह अन्य देशों की अपेक्षा कम है और सरकार के न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में प्रयासों से विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 32 तक 22 गीगावाट न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिसका दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के डिजाइन, विकास और स्थापित करने के लिए 200 अरब रुपए आवंटित करने वाले एक समर्पित न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा, अधिक लचीली, विस्तार योग्य और संभावित रूप से निजी क्षेत्र के अनुकूल परमाणु तैनाती की दिशा में एक बदलाव का संकेत देती है।

शांति फ्रेमवर्क के तहत प्रस्तावित सुधारों सहित समानांतर विधायी प्रयासों का उद्देश्य नियामक वातावरण का आधुनिकीकरण करना और नियामक निगरानी के तहत निजी भागीदारी को बढ़ाना है।

रिपोर्ट में मॉर्गन स्टेनली ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि इस रणनीति की सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी, विशेष रूप से वित्तपोषण, नियामक सुधार और आपूर्ति श्रृंखला विकास में। क्षमता विस्तार को आकार देने में वैश्विक साझेदारियां महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।"

विभिन्न देशों में, कनाडा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा क्योंकि वह एक नए दीर्घकालिक समझौते के तहत भारत को यूरेनियम की आपूर्ति कर रहा है। भारत की परमाणु यात्रा में अमेरिका की भूमिका ईंधन-केंद्रित होने के बजाय अधिक संभावित और प्रौद्योगिकी-केंद्रित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका-भारत नागरिक परमाणु ढांचा महत्वपूर्ण बना हुआ है, और हमारा मानना ​​है कि एसएमआर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यापक वाणिज्यिक हितों से संबंधित हालिया कदम बताते हैं कि यदि देयता और नियामक सुधार लागू होते हैं, तो रिएक्टर प्रौद्योगिकी, उपकरण और परियोजना भागीदारी में अमेरिका अधिक प्रासंगिक हो सकता है।

भारत पीएलआई और नीतिगत प्रोत्साहनों के समर्थन से खुद को एक वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। ध्यान गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित हो रहा है, हालांकि खरीद प्रक्रियाएं और आपूर्ति श्रृंखला में कमियां अभी भी बाधाएं बनी हुई हैं।

--आईएएनएस

एबीएस/

Related posts

Loading...

More from author

Loading...