विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर उत्तरकाशी में जागरूकता कार्यक्रम, युवाओं को दिलाई नशामुक्ति की शपथ

योग सत्र और जागरूकता अभियान के जरिए छात्रों को बताए तंबाकू के दुष्प्रभाव

उत्तरकाशी :विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2026 के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग उत्तरकाशी द्वारा जनपदभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.एस. रावत के मार्गदर्शन में रामचंद्र उनियाल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय उत्तरकाशी में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों के लिए विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया तथा तंबाकू उत्पादों के सेवन और उनके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए सभी प्रतिभागियों को तंबाकू निषेध की शपथ दिलाई गई।

इस वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम "आकर्षण का पर्दाफाश- निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला" रखी गई है। कार्यक्रम के दौरान जिला सलाहकार ज्ञानेन्द्र सिंह पंवार ने तंबाकू के बढ़ते दुष्प्रभावों और उससे उत्पन्न हो रही वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन के कारण प्रतिवर्ष विश्वभर में लगभग 80 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है। भारत विश्व के कुल तंबाकू उपभोक्ताओं का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा रखता है, जिसके चलते देश में प्रतिवर्ष करीब 13 लाख लोगों की मौत तंबाकूजनित बीमारियों के कारण होती है।

उन्होंने कहा कि युवाओं में तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की बढ़ती लत गंभीर चिंता का विषय है। विश्व स्तर पर 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 4 करोड़ किशोर किसी न किसी रूप में तंबाकू या निकोटीन आधारित उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं। इनमें भारत के 8 से 9 प्रतिशत किशोर भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्वयं धूम्रपान न करने वाले लगभग 29.5 प्रतिशत छात्र-छात्राएं भी पैसिव स्मोकिंग अथवा सेकेंड हैंड स्मोक के दुष्प्रभावों की चपेट में हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में दशकों से प्राप्त उपलब्धियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

कार्यक्रम में बताया गया कि तंबाकू के सेवन और उसके संपर्क में आने से गले, फेफड़े, पेट, अग्न्याशय, मूत्राशय तथा गर्भाशय ग्रीवा सहित विभिन्न प्रकार के कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हृदय रोग, स्ट्रोक, सीओपीडी, तपेदिक, अस्थमा, प्रजनन क्षमता में कमी, पुरुषों में नपुंसकता, महिलाओं में बांझपन, पाचन तंत्र संबंधी विकार तथा पेट के अल्सर जैसी गंभीर बीमारियां भी तंबाकू सेवन से जुड़ी हुई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में कैंसर के प्रत्येक 10 मरीजों में से लगभग 6 मरीज तंबाकू सेवन से प्रभावित होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अन्य प्रतिभागियों को तंबाकू उत्पादों के उपयोग से दूर रहने तथा अपने परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और समाज के अन्य लोगों को भी तंबाकू एवं धूम्रपान से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।

कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की नशा उन्मूलन समिति के संयोजक डॉ. एम.पी.एस. राणा, डॉ. परेन्द्र सिंह जयाड़ा, डॉ. विकास तथा योग प्रशिक्षक पूजा के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर एनसीसी के छात्र-छात्राओं, महाविद्यालय के शिक्षकगण तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की सोशल वर्कर सोनिया बिष्ट सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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