ऋषिकेश : गंगा व गंगा घाटों को स्वच्छ व उनकी निर्मलता बनाए रखने के उद्देश्य से योगनगरी ऋषिकेश के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर पहुंची जेबीआईटी कॉलेज की टीम ने गंगा घाट पर फैली गंदगी को समेटा और गंगा में बह रहे कचरे को भी बाहर निकाला। इस दौरान टीम ने तीर्थ यात्रियों को स्वच्छता का संदेश भी दिया।
शनिवार को डा० लक्ष्मी नेगी के नेतृत्व में जेबीआईटी की टीम ने त्रिवेणी घाट पहुंचकर गंगा घाट पर सफाई अभियान छेड़ा। इस दौरान उन्होंने घाट पर फैली गंदगी व भगवानों की फोटो व मूर्तियों को देख वहा स्नान कर रहे श्रद्धालुओं को कड़ा संदेश दिया। डॉ लक्ष्मी नेगी ने गंगा में फोटो व मूर्तिया बहा रहे लोगों को सख्त लहजे में नसीहत देते हुए कहा कि जब तक इन फोटो मूर्तियों को आप अपने घरों में पूज रहे थे तो यह आपके लिए भगवान थे और जब जी चाहा तो उन्हें यहां घाट पर इधर उधर फेंक दिया, क्या यही आपकी श्रद्धा है। उन्होंने गंगा में जूते चप्पल लेकर स्नान कर रहे तीर्थ श्रद्धालुओं को भी फटकारते हुए कहा कि आप अगर दो कदम भी नंगे पांव नहीं चल सकते तो ऐसा स्नान करने का क्या फायदा, जिससे मां गंगा व तीर्थ स्थल की मर्यादा भंग होती हो। गंगा के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए उन्होंने कुछ कड़े शब्दों में नसीहत दी।
गंगा घाट की सफाई के साथ साथ डॉ लक्ष्मी ने यहां आने वाले सभी तीर्थ यात्रियों व स्थानीय नागरिकों से भी अपील की है कि वह गंगा की स्वच्छता व निर्मलता बनाए रखने में अपना सहयोग करे और किसी भी तरह का कचरा गंगा में ना बहाए, जिससे गंगा प्रदूषण को रोका जा सके।
गंगा सभा नहीं निभा रही दायित्व
वैसे गंगा घाट पर फैली गंदगी व जूते चप्पल लेकर गंगा में उतरते लोगों को रोकने आदि व्यवस्था देखने का काम यहां की कार्यदायी संस्था गंगा सभा का है। लेकिन देखा गया कि गंगा सभा का कोई भी नुमाइंदा इस निगरानी ने नहीं है। तो क्या उसका काम केवल चढ़ावा लेना और गंगा आरती तक ही सीमित है। जबकि हरिद्वार में गंगा सभा पूरी मुस्तैदी के साथ अपना दायित्व निभाती है। चाहे कितनी भी भीड़ हो कोई भी यात्री चप्पल जुटे लेकर प्रवेश नहीं कर सकता। लेकिन त्रिवेणी घाट की स्थिति बिल्कुल भिन्न नजर आती है जहां जिम्मेदार संस्था ही अपने दायित्वों से नजर फेरे हुए है।