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वाशिंगटन, 29 मई (आईएएनएस)। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि तेहरान अब उन मुद्दों पर बात कर रहा है जिन पर पहले की अमेरिकी सरकारें उसे कभी बातचीत के लिए तैयार नहीं कर पाईं। ट्रंप प्रशासन ने दाव किया कि सैन्य और आर्थिक दबाव डालने की उसकी रणनीति ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की टेबल पर लाने में कामयाबी हासिल की है।
व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेसेंट ने पत्रकारों से कहा कि हाल की घटनाओं से साफ है कि ईरान का रुख बदला है और वाशिंगटन की रणनीति असर दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वो कर दिखाया जो कोई दूसरी सरकार नहीं कर पाई। हमने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर बात करने के लिए तैयार किया है और शायद वह इस बात के लिए भी मान जाए कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।
ये बयान ऐसे समय आए हैं जब ट्रंप प्रशासन लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि तेहरान के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक माहौल है, हालांकि उसने किसी संभावित समझौते की खबरों की पुष्टि नहीं की।
बेसेंट ने बार-बार कहा कि भविष्य में कोई भी समझौता तभी होगा जब ईरान अमेरिका की कुछ मुख्य शर्तें माने। इनमें अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम को सौंपना, परमाणु हथियार बनाने की कोशिश छोड़ना और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह खुला रखना शामिल है।
साथ ही उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव ने ईरान को अपना रवैया बदलने पर मजबूर किया है।
उन्होंने कहा कि अगर आप सैन्य कार्रवाई और आर्थिक दबाव के नतीजे देखें, तो यह साफ है कि इसी वजह से ईरान बातचीत की मेज पर आया है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी ने यह भी संकेत दिया कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान ठोस कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी जारी है।
उन्होंने कहा, “जब तक होर्मुज स्ट्रेट खुला नहीं रहता और ईरान यह नहीं मानता कि उसे अपना उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम सौंपना होगा और वह परमाणु कार्यक्रम नहीं चला सकता, तब तक कुछ भी तय नहीं होगा।”
बेसेंट ने यह भी दावा किया कि हाल की घटनाओं के बाद ईरानी नेतृत्व कमजोर पड़ा है और उसके अंदर तालमेल की कमी दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार, चुनी हुई सरकार, आईआरजीसी और धार्मिक नेता इन तीन हिस्सों में बंटी हुई है। और इनके बीच ठीक से बातचीत नहीं हो पा रही।
हालांकि उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका दबाव और बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा शांति समझौता पसंद करते हैं। लेकिन हमारे धैर्य की भी एक सीमा है। अगर राष्ट्रपति ट्रंप को लगा कि शांति समझौता संभव नहीं है, तो फिर सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।
प्रशासन की ये टिप्पणियां उसकी व्यापक रणनीति को दिखाती हैं, जिसमें वह ईरान नीति को 'दबाव और बातचीत' के मिश्रण के रूप में पेश कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य कदमों ने अमेरिका की बातचीत की स्थिति को कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत किया है।
--आईएएनएस
एवाई/एएस