ट्रंप के बयान से आहत कई ईसाई, अहमदाबाद के पादरी सेड्रिक प्रकाश बोले- पोप लियो कमजोर नहीं ताकतवर

अहमदाबाद, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV के लिए तल्ख टिप्पणी की। कई ईसाइयों ने उनकी टिप्पणी को बेवजह बताया और शांति के लिए पोप के प्रयासों को सराहा। अहमदाबाद के कैथोलिक पादरी सेड्रिक प्रकाश ने कहा कि ट्रंप भले ही पोप लियो को कमजोर बताएं लेकिन सच्चाई ये है कि शांति, सद्भाव और अहिंसा की बात करने वाले पोप ताकतवर हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए पादरी प्रकाश ने कहा, "जो ट्रंप ने कहा वो गलत है। पोप की भूमिका सबके लिए होती है। हम समझ सकते हैं कि जो उन्होंने कहा वो मानवजाति के लिए है, दुनिया के लिए है, महज ईसाइयों के लिए नहीं। पूरी दुनिया को उन्होंने संबोधित किया है। पोप तो केवल तीन बातों पर जोर दे रहे हैं।"

पादरी ने ईसा मसीह के दिखाए रास्ते का हवाला देते हुए उन तीन बातों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहली बात जो उन्होंने कही, वो ये है कि जंग को आप सही करार नहीं दे सकते, घृणा को स्वीकार नहीं किया जा सकता, और हिंसा किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराई जा सकती।

दूसरी बात, वो (पोप) पूरी दुनिया के शीर्ष नेतृत्व से अपील कर रहे हैं कि आप संवाद कायम करें और बातचीत जारी रखें। चाहे वो अमेरिका के राष्ट्रपति हों, इजरायल के पीएम हों या फिर ईरान की कमान संभाल रहे लोग, सबसे एक टेबल पर बैठकर बातचीत जारी रखने का आग्रह कर रहे हैं।

तीसरी सबसे जरूरी बात वो कह रहे हैं कि "दुनिया के लिए शांति जरूरी है।"

बड़ी अजीब बात है कि ट्रंप ने कहा कि वो कट्टर वामपंथियों के प्रभाव में हैं, लेकिन पोप ऐसे नहीं हैं। वो ईसाई धर्म से संबंध रखते हैं। वो प्यार, शांति, सद्भाव और न्याय की बात करते हैं।

सबसे ज्यादा नाराजगी ट्रंप के उस बयान पर है जिसमें उन्होंने कहा कि पोप अमेरिका की विदेश नीति के लिए "कमजोर" हैं। अहमदाबाद स्थित कैथोलिक चर्चा के पादरी ने सवालिया अंदाज में कहा, "हम पूछना चाहेंगे ये कैसे होता है, जरा हमें बताएं? पोप लियो कह रहे हैं कि दुनिया को शांति चाहिए और दुनिया के शीर्ष नेतृत्व की ये जिम्मेदारी है कि वो शांति व्यवस्था स्थापित करें। हरेक शख्स शांति और निडर होकर रहे। भला ये बातें कहां आपकी विदेश नीति को कमजोर करती हैं!"

उन्होंने आगे कहा, "जो वो (ट्रंप) कर रहे हैं वो स्वीकार्य नहीं है। पोप लियो बहुत शक्तिशाली इंसान हैं। वो खुद को साउथ अमेरिका के पेरू का निवासी बताते हैं जबकि पले-बढ़े वो शिकागो में हैं। ये दो अमेरिकियों के बीच की जंग नहीं है। बल्कि ऐसे लोगों के बीच है जिसमें से एक पोप हैं जो दुनिया के हरेक शख्स के लिए शांति, सद्भाव, न्याय और अहिंसा की बात करते हैं तो दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप हैं जो केवल हिंसा, घृणा का प्रसार और हिंसा चाहते हैं।"

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार देर रात पोप लियो पर जबरदस्त निशाना साधा और उन्हें क्राइम को लेकर "कमजोर" और विदेश नीति के लिए "भयानक" बताया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में उन्हें चरमपंथी वामपंथ के प्रभाव में रहने का आरोप भी लगाया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोस्ट में दावा किया कि केवल उनके राष्ट्रपति होने के कारण अमेरिका में जन्मे लियो पोप बने हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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