वॉशिंगटन, 4 जून (आईएएनएस)। अमेरिका में सामान भेजने वाली विदेशी कंपनियों की अब कड़ी जांच होगी। टैरिफ चोरी और नकली या अवैध सामान पर सख्त कार्रवाई होगी और नियम तोड़ने वालों के लिए अमेरिका में व्यापार करना मुश्किल हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक व्यापक कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद अमेरिका में आने वाले विदेशी सामानों की कड़ी जांच करना और टैरिफ (आयात शुल्क) चोरी रोकना है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कई विदेशी कंपनियां नियमों की कमियों का फायदा उठाकर शुल्क चोरी करती हैं और अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए सरकार व्यापार नियमों को सख्ती से लागू करना चाहती है।
इस आदेश के तहत अमेरिका में सामान भेजने वाली कंपनियों को अब ज्यादा जानकारी देनी होगी। कंपनियों को बताना होगा कि उनके असली मालिक कौन हैं। जो कंपनियां गलत जानकारी देंगी या शुल्क चोरी करेंगी, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। आयातकों से ज्यादा वित्तीय गारंटी (बॉन्ड) मांगी जा सकती है। कस्टम्स विभाग ऑडिट और जांच को और सख्त करेगा।
अगर कोई भारतीय या अन्य विदेशी कंपनी अमेरिका को सामान बेचती है तो उसे नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। गलत जानकारी देने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
आदेश के तहत अमेरिका को निर्यात करने वाली विदेशी कंपनियों की ज्यादा जांच होगी। विदेशी कंपनियां कुछ आसान आयात प्रक्रियाओं का फायदा नहीं उठा पाएंगी। अमेरिका में सामान भेजने के लिए अतिरिक्त नियमों का पालन करना होगा।
इस आदेश के तहत संघीय एजेंसियों को कस्टम्स प्रक्रियाओं में बदलाव करने, आयातकों से अधिक जानकारी लेने, ऑडिट और जुर्माने को सख्त करने तथा उन खामियों को बंद करने का निर्देश दिया गया है, जिनकी वजह से कंपनियां शुल्क से बच निकलती हैं, अपनी वास्तविक मालिकाना संरचना छिपाती हैं और अमेरिकी व्यापार कानूनों को दरकिनार करती हैं।
बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को हस्ताक्षरित इस आदेश में कहा गया है, "कस्टम्स प्रवर्तन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।" आदेश में यह भी कहा गया कि "व्यवस्था की कमियां, कानूनी खामियां, कमजोर प्रवर्तन तंत्र और पुरानी प्रक्रियाओं ने गलत इरादों वाले लोगों को कानून से बचने के अवसर दिए हैं।"
व्हाइट हाउस में आदेश पर हस्ताक्षर करने से पहले अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा आयुक्त रॉडनी स्कॉट ने कहा कि प्रशासन अब सीमा सुरक्षा की नीति को व्यापार प्रवर्तन में भी लागू कर रहा है।
उन्होंने कहा, "हम वही सिद्धांत व्यापार पर लागू कर रहे हैं ताकि अमेरिकी उद्योगों की रक्षा की जा सके। अलग-अलग देश और लोग आयात-निर्यात नियमों तथा टैरिफ व्यवस्था को कमजोर कर अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और हम इसे रोकेंगे।"
आदेश के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को 180 दिनों के भीतर आयातकों की पात्रता से जुड़े नियमों में संशोधन करना होगा। इसके तहत आयातकों के लिए अधिक वित्तीय गारंटी (बॉन्ड), मालिकाना जानकारी का विस्तृत खुलासा और आयात की मात्रा, कारोबारी संबंधों तथा अमेरिका में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
प्रशासन विदेशी आयातकों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। उसका मानना है कि उनके खिलाफ कार्रवाई करना कठिन होता है, क्योंकि उनकी संपत्तियां, कारोबार और प्रमुख लोग अक्सर विदेशों में होते हैं। आदेश में एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि विदेशी आयातकों को कुछ अनौपचारिक आयात प्रक्रियाओं का उपयोग करने से रोका जाए और अमेरिका में औपचारिक आयात के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू की जाएं।
आदेश का एक महत्वपूर्ण प्रावधान आयातकों के लिए "गुड स्टैंडिंग" यानी अच्छी स्थिति की शर्त तय करता है। जिन कंपनियों पर अवैध रूप से फेंटानिल, उससे जुड़े रसायन या अन्य प्रतिबंधित सामान आयात करने का आरोप साबित होगा, वे अमेरिका में सामान आयात करने का अधिकार खो सकती हैं।
इसके अलावा आयातकों, कस्टम्स ब्रोकरों और माल ढुलाई एजेंसियों की अधिक गहन जांच की जाएगी। उनके अनुपालन और रिकॉर्ड के आधार पर जोखिम स्तर तय किए जाएंगे।
ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवार्रो ने कहा कि इस पहल से सरकार को बड़ा राजस्व मिलेगा और कस्टम्स धोखाधड़ी में कमी आएगी। उन्होंने कहा, "इस कार्यकारी आदेश से हर साल 20 से 30 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। हम फेंटानिल, असुरक्षित उत्पादों, नकली सामान और टैरिफ चोरी करने वालों पर सख्ती करेंगे।"
व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल स्कार्फ ने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयातक सीमा पार आने वाले सामान की सही जानकारी दें और शुल्क व टैरिफ का सही भुगतान करें। उन्होंने कहा, "हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आयातक जो सामान अमेरिका ला रहे हैं, उसकी सही जानकारी दें, अवैध या प्रतिबंधित सामान देश में न आए और आयातित वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क और टैरिफ का सही हिसाब रखा जाए।"
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन टैरिफ, सप्लाई चेन सुरक्षा और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली व्यापार नीति पर जोर दे रहा है। दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि अमेरिकी उद्योगों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए व्यापार नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है।
--आईएएनएस
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