शहबाज शरीफ बोले- इमरान ने पाक का निकाल दिया दिवाला, आर्थिक हालात सुधरने बढ़ाए पेट्रोल के दाम

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इस्लामाबाद: आर्थिक रूप से बेहाल पाकिस्तान में आम जनता पर महंगाई की मार के साथ पेट्रोल के दामों में भारी मुल्य वृद्धि की दोहरी मार पड़ रही है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को पेट्रोल के बढ़ते दामों से जनता को राहत देने के लिए एक रिलीफ पैकेज का ऐलान किया है। शहबाज शरीफ ने 28 हजार पाकिस्तानी रुपए करीब 10 हजार करोड़ भारतीय रुपए का राहत पैकेज लॉन्च किया। शहबाज शरीफ ने इस दौरान कहा कि ये राहत पैकेज गरीबों पर पेट्रोल और डीजल के दाम से होने वाले बोझ को कम करेगा। बता दें कि एक दिन पहले ही शहबाज शरीफ ने पेट्रोल के दामों से सब्सिडी हटा कर उसमें 30 रुपए की बढ़ोतरी की है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 179.85 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। डीजल की कीमत 174.15 रुपये प्रति लीटर, और केरोसीन की कीमत 155.95 रुपये तक पहुंच गई। राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि पूर्व की इमरान खान सरकार के कारण उन्हें सख्त कदम उठाने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारी मन से सरकार को तेल के दाम बढ़ाने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि 1.4 करोड़ गरीब परिवारों को 2000 रुपए प्रति परिवार दिया जाएगा। इससे 8.5 करोड़ लोगों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि ये बेनजीर आय सहायता कार्यक्रम के तहत दी जा रही आर्थिक मदद के अतिरिक्त है। अगले बजट में इस राहत पैकेज को जोड़ा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि यूटिलिटी स्टोर्स को निर्देश दिया गया है कि 10 किलो बोरी आटे की कीमत को 400 रुपए निर्धारित की जाए। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान को दिवालिया होने से बचाने के लिए तेल के दाम बढ़ाना जरूरी था। शहबाज शरीफ ने कहा कि, 'पिछली सरकार ने जानबूझ कर तथ्यों को छुपाया है। मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि आईएमएफ के साथ आपने सौदा किया है, न कि हमने। उनी कड़ी शर्तों को आपने माना है। आपने देश को संकट में डाला है।' इमरान खान की पार्टी पीटीआई की तरफ से तेल के दामों पर सब्सिडी देने को उन्होंने आने वाली सरकार के लिए जाल करार दिया। उन्होंने कहा, 'दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं, लेकिन इमरान सरकार ने उस पर सब्सिडी दी ये जानते हुए भी कि हमारा राजकोष इसका बोझ नहीं उठा सकता।' उन्होंने आगे कि कि मैंने चार साल पहले अर्थव्यवस्था का चार्टर प्रस्तावित किया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। अगर उसे मान लिया जाता तो कोई भी सरकार अर्थव्यवस्था का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं कर पाती।

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