राष्ट्रपति ट्रंप और शी की मुलाकात से पहले अमेरिका का एक्शन, ईरान से संबंधों को लेकर चीनी कंपनियों पर लगाया बैन

वाशिंगटन, 9 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने चीन के दौरे पर जाएंगे, जहां वह प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। ट्रंप के चीन दौरे से पहले अमेरिका में चीन के तकनीकों को लेकर गहन चर्चा हो रही है। अमेरिकी सीनेटरों ने चीन के तकनीक को लेकर एक प्रस्ताव भी पेश किया। इस बीच अमेरिका ने ईरान के साथ कनेक्शन की वजह से कई चीनी कंपनियों पर नए बैन लगा दिए।

अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने बताया कि अमेरिकी राज्य विभाग ने शुक्रवार को चार कंपनियों पर बैन लगाया। इनमें से तीन चीन में हैं, जो सैटेलाइट इमेजरी देने से जुड़ी हैं। इन कंपनियों के बारे में कहा गया कि इसने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी फोर्स पर ईरानी हमलों को मुमकिन बनाया।

सीएनएन ने बताया कि अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार को 10 लोगों और कंपनियों को नामजद किया। इनमें से कई चीन में हैं, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन बनाने के लिए जरूरी हथियार और सामान हासिल करने में मदद की।

अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "आज की कार्रवाई चीन में मौजूद संस्थाओं को ईरान को उनके समर्थन के लिए जिम्मेदार ठहराती है। अमेरिका ईरान के मिलिट्री और डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस की मदद करने वाली तीसरे देश की संस्थाओं और लोगों को टारगेट करने के लिए अपने पास मौजूद सभी जरूरी कार्रवाई करेगा।"

बता दें कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान से कच्चा तेल खरीदने को लेकर कई चीनी रिफाइनरियों पर बैन लगाए, जिसके बाद चीन ने कंपनियों को बैन न मानने का आदेश दिया।

बीजिंग की विदेश मंत्रालय ने लगातार कहा कि वह एकतरफा बैन का विरोध करता है जिसका इंटरनेशनल कानून में कोई आधार नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह चीनी नागरिकों और कंपनियों के अधिकारों की रक्षा करेगा।

इस बीच अमेरिकी मीडिया ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान में बातचीत हो सकती है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अगले हफ्ते इस्लामाबाद में फिर से शुरू हो सकती है।

जर्नल के मुताबिक, दोनों पक्ष 14बिंदुओं वाले एमओयू को तैयार करने के लिए मध्यस्थों के साथ काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य युद्ध खत्म करने की दिशा में एक महीने तक चलने वाली बातचीत के लिए रूपरेखा तय करना है।

--आईएएनएस

केके/डीकेपी

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