वेटिकन: वेटिकन सिटी के प्रमुख और 1.3 अरब कैथोलिकों के आध्यात्मिक नेता होने के नाते, पोप को एक ऐसा दर्जा प्राप्त है जो उन्हें किसी भी देश में बिना वीज़ा यात्रा की अनुमति देता है। यह विशेष अधिकार न तो ब्रिटेन के राजा को मिला है, न ही जापान के सम्राट को। यह संभव हो सका है वेटिकन सिटी के उनके विशेष दर्जे के कारण, जो उन्हें एक संप्रभु राष्ट्राध्यक्ष और धार्मिक नेता दोनों के रूप में पहचान देता है।
जब पोप किसी देश की यात्रा करते हैं, तो उन्हें उस देश का ‘स्टेट गेस्ट’ यानी राजकीय अतिथि माना जाता है। इसके तहत वीज़ा और पासपोर्ट की औपचारिकताएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। वेटिकन और इटली के बीच 1929 में हुई लैटरन संधि ने वेटिकन को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया, और पोप को पूर्ण राजनयिक छूट (डिप्लोमैटिक इम्युनिटी) प्राप्त हुई। वहीं, 1961 की वियना कन्वेंशन में पोप की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत विशेष मान्यता मिली। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भी वीज़ा छूट मिलती है, लेकिन उनकी स्थिति पोप जैसी प्रभावशाली नहीं मानी जाती।






