पाकिस्तान में 34 अफगान नागरिक गिरफ्तार, अवैध घुसपैठ और निर्वासन पर फिर बढ़ा विवाद

बलूचिस्तान में महिलाओं और बच्चों समेत 34 अफगान नागरिक हिरासत में, जांच तेज
पाकिस्तान: जांच एजेंसी ने ग्वादर जा रहे 34 अफगान नागरिकों को किया गिरफ्तार, बच्चे और महिलाएं भी शामिल

क्वेटा: पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने बच्चों और महिलाओं समेत 34 अफगान नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया है। कथित तौर पर ये लोग आवश्यक दस्तावेजों के बगैर पाकिस्तान में प्रवेश कर बलूचिस्तान के ग्वादर की ओर जा रहे थे।

स्थानीय मीडिया ने एफआईए प्रवक्ता के हवाले से इसकी जानकारी दी।

पाकिस्तान के दैनिक ‘डॉन’ में बुधवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एफआईए के प्रवक्ता ने बताया कि तुर्बत विंग ने खुफिया सूचना मिलने के बाद सीपेक रोड क्षेत्र में छापेमारी कर 34 अफगान नागरिकों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर अवैध तरीके से ग्वादर क्षेत्र के रास्ते ईरान में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए अफगान नागरिकों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। प्रारंभिक पूछताछ के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया और विदेशी नागरिकों की अवैध आवाजाही में शामिल लोगों और नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

प्रवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई अवैध मानव तस्करी और दस्तावेजों के बगैर सीमा पार आवाजाही पर पाबंदी लगाने के तहत की गई।

पिछले सप्ताह अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एएमएसओ) ने कहा था कि पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारी, दुर्व्यवहार, वसूली और जबरन निर्वासन की धमकियों का अक्सर सामना करना पड़ता है।

8 मई को जारी एक रिपोर्ट में एएमएसओ ने कहा कि 2023 से अब तक पाकिस्तान और ईरान से 34 लाख से अधिक अफगान प्रवासियों को निर्वासित किया जा चुका है। अफगान समाचार एजेंसी ‘खामा प्रेस’ के अनुसार, यह कार्रवाई बिना दस्तावेज वाले विदेशियों के खिलाफ तेज हुए अभियान के बीच की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 68.3 प्रतिशत अफगानों ने बताया कि उन्हें गिरफ्तार किया गया या जेल में डाला गया, जबकि हिरासत में लिए गए 96.4 प्रतिशत लोगों ने गिरफ्तारी या नजरबंदी के दौरान दुर्व्यवहार का सामना करने की बात कही। वहीं, 85.7 प्रतिशत लोगों को गिरफ्तारी से बचने या हिरासत से रिहा होने के लिए पैसे देने पड़े।

इसके अलावा, 75.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने धमकी, अपमान और मानसिक उत्पीड़न का सामना करने की बात कही, जबकि 72.4 प्रतिशत लोगों को बिना न्यायिक समीक्षा के 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया।

संगठन ने कहा कि पाकिस्तान में किसी भी व्यक्ति को देश से निकालते वक्त व्यक्तिगत जोखिम आकलन नहीं किया गया।

एएमएसओ ने बताया कि यह रिपोर्ट वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर के साथ मिलकर तैयार की गई और इसे संयुक्त राष्ट्र की यातना विरोधी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

रिपोर्ट, 41 अफगान नागरिकों पर किए गए सर्वेक्षण, छह विस्तृत साक्षात्कारों तथा संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर), अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम), एमनेस्टी इंटरनेशनल और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग जैसे संगठनों के दस्तावेजों पर आधारित हैं।

पाकिस्तान ने 2023 के अंत से सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आर्थिक दबावों का हवाला देते हुए बिना दस्तावेज वाले अफगान नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया तेज कर दी है।

--आईएएनएस

 

 

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