पाकिस्तान ने 92 भारतीय श्रद्धालुओं को वीजा देने से किया इनकार: रिपोर्ट

इस्लामाबाद, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार ने 92 भारतीय श्रद्धालुओं को वीजा देने से इनकार कर दिया है। यह दावा ‘खालसा वॉक्स’ न्यूज पोर्टल पर प्रकाशित एक लेख में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहले इन श्रद्धालुओं को 10 से 19 अप्रैल के बीच वीजा जारी किया गया था, इस दौरान उन्होंने गुरुद्वारा पंजा साहिब में खालसा सजना दिवस मनाया।

लेख में बताया गया है कि इन 92 श्रद्धालुओं के नामों के साथ "सिंह" या "कौर" नहीं जुड़ा है, लेकिन वे सभी सिख गुरुओं में गहरी आस्था रखते हैं। लेख के लेखक सुदीप सिंह ने पाकिस्तान सरकार की "खराब नीतियों" को इस फैसले के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि इस कदम से भारतीय परिवारों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और उन्हें धार्मिक यात्रा से वंचित किया गया है। लेख में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह निर्णय सहजधारी श्रद्धालुओं को गुरुद्वारों से दूर करने की सोची-समझी कोशिश का हिस्सा हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत और दुनिया भर में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो गुरु ग्रंथ साहिब में आस्था रखते हैं और अपने पारिवारिक संस्कार सिख परंपराओं के अनुसार करते हैं।

लेख में हिंदू और सिख परिवारों के रिश्तों को अटूट बताया। जिन्हें अलग करना लगभग नामुमकिन है।

इसके अलावा, लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान की ओर से जारी किया गया वीजा शेड्यूल भारत के कार्यक्रम से मेल नहीं खाता था। भारत सरकार ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और पंजाब सरकार की सिफारिशों के आधार पर 12 से 21 अप्रैल के बीच ‘जत्था’ भेजने का कार्यक्रम तय किया था।

लेख में पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वह एक ओर सिख समुदाय के प्रति सहानुभूति दिखाता है, जबकि दूसरी ओर उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर भारत में नशीले पदार्थ और हथियार भेजने तथा विदेशों में खालिस्तान समर्थक तत्वों को आर्थिक सहायता देने के आरोप लगते रहे हैं।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के विदेश मामलों के सलाहकार परमजीत सिंह चंदोक के हवाले से लेख में बताया गया कि इस मुद्दे को पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया गया है।

लेख में सिंधी समुदाय की सिख संस्थाओं में आस्था का भी जिक्र करते हुए आशंका जताई गई है कि भविष्य में ऐसी नीतियों के चलते उनके गुरुद्वारों में प्रवेश पर भी पाबंदी लगाई जा सकती है।

--आईएएनएस

केआर/

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