पाकिस्तान में गरीब परिवारों के बच्चों के सामने शिक्षा में बड़ी बाधाएं, लाखों अब भी स्कूल से बाहर

इस्लामाबाद, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान में गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों को अब भी शिक्षा हासिल करने में गंभीर संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि संपन्न परिवारों के बच्चों को बेहतर स्कूलिंग और उज्ज्वल करियर के अवसर मिल रहे हैं। यह खुलासा एक रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में करीब 2.62 करोड़ बच्चे अब भी स्कूल से बाहर हैं, जिनमें 1.34 करोड़ लड़कियां शामिल हैं। स्कूल जाने की उम्र के लगभग 20 से 28 प्रतिशत बच्चे किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित नहीं हैं। इनमें से कई बच्चों को शिक्षा के बजाय जीविका को प्राथमिकता देनी पड़ती है।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में प्रकाशित संपादकीय में सवाल उठाया गया कि कुछ बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिलता है, जबकि अन्य इससे वंचित क्यों रह जाते हैं। गुणवत्तापूर्ण स्कूल केवल उन लोगों के लिए क्यों हैं, जो उनका खर्च उठा सकते हैं, जबकि लाखों बच्चों को कमजोर विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ता है।

संपादकीय में कहा गया कि बच्चे जन्म से समान होते हैं और उनमें वर्ग, हैसियत या भेदभाव की कोई भावना नहीं होती। समाज ही उन्हें असमानता और ऊंच-नीच का एहसास कराता है।

रिपोर्ट में बताया गया कि खासतौर पर ग्रामीण और संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों के लाखों बच्चों को बुनियादी अधिकार भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी के अवसरों तक सीमित पहुंच मिलती है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सहायक प्रोफेसर मुजीब अली ने कहा कि वर्षों बाद भी वही स्थिति बनी हुई है। संपन्न परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर अवसर मिलते हैं, जिससे वे प्रतिष्ठित करियर तक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि दूसरी ओर गरीब परिवारों के बच्चों को कमजोर सरकारी स्कूल, सीमित संसाधन और अपर्याप्त सहयोग मिलता है। अमीर परिवारों के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी या प्रशासक बनने की अधिक संभावना रखते हैं, जबकि गरीब परिवारों के बच्चों को कम वेतन और श्रम आधारित कामों की ओर धकेल दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह प्रतिभा की कमी नहीं, बल्कि अवसरों की कमी का परिणाम है।

--आईएएनएस

डीएससी

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