पाकिस्तान: इमरान खान के इलाज को लेकर पीटीआई ने जताई चिंता, बेहतर मेडिकल सुविधा और शिफ्टिंग की मांग

इस्लामाबाद, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने एक बार फिर अपने संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, उनकी पत्नी बुशरा बीबी और पार्टी के वरिष्ठ नेता एजाज चौधरी की सेहत को लेकर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि सही इलाज की कमी और मेडिकल सुविधाओं तक सीमित पहुंच की वजह से उनकी हालत लगातार खराब हो रही है।

पीटीआई के मुताबिक, लंबे समय से हिरासत में रहने और इलाज में दिक्कतों के कारण इन नेताओं की बीमारियां और बढ़ गई हैं। खबरों के अनुसार, इमरान खान और बुशरा बीबी आंखों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि एजाज चौधरी की किडनी की बीमारी तीसरे स्टेज तक पहुंच गई है।

पाकिस्तान के एक प्रमुख दैनिक अखबार 'डॉन' के संपादकीय में बताया गया है कि पार्टी ने मांग की है कि इन तीनों को अच्छे अस्पतालों में शिफ्ट किया जाए और उनके निजी डॉक्टरों से इलाज कराया जाए, ताकि सही तरीके से देखभाल हो सके।

र‍िपोर्ट के मुताबिक, पीटीआई की ये मांगें गलत नहीं हैं और सरकार को इन्हें मानने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि इलाज की कमी के कारण इन नेताओं या अन्य कैदियों (जिनमें कैंसर सर्वाइवर यास्मीन राशिद भी शामिल हैं) के साथ कोई अनहोनी हो जाए।

पिछले महीने इमरान खान के बेटे कास‍िम खान ने अपने पिता की हिरासत को 'मनमाना' बताया और कहा कि उनके साथ किया जा रहा व्यवहार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का उल्लंघन है।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के एक सत्र के दौरान कासिम खान ने कहा कि उनके पिता का मामला अकेला नहीं है, बल्कि 2022 से पाकिस्तान में हो रहे व्यापक दमन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक कैदियों को जेल में रखा जा रहा है, आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं, और पत्रकारों को चुप कराया जा रहा है, अगवा किया जा रहा है या देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

कासिम ने यह भी कहा कि उनके पिता को अकेले कैद में रखा गया है, उन्हें परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा और सही इलाज भी नहीं मिल रहा। उन्होंने यह भी उठाया कि आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाना अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा, “मैं और मेरा भाई राजनीतिक लोग नहीं हैं। हम कभी ऐसे मंचों पर नहीं आना चाहते थे, लेकिन हमारे पिता की जिंदगी हमें मजबूर कर रही है कि हम आवाज उठाएं। हम चुप नहीं रह सकते जब उनकी सेहत खराब हो रही है और हमें उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा। अगर हालात उल्टे होते तो हमें पता है कि वो हमारे लिए आखिरी तक लड़ते। हम कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं।”

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

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