कराची में बेटियां भी सुरक्षित नहीं, अपहरण और जबरन शादी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

इस्लामाबाद, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कराची में ईसाई समूहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने देश भर में अपने समुदाय की नाबालिग लड़कियों के साथ जबरदस्ती शादी और धर्म-परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई।

'वॉइस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) के अनुसार, 29 मार्च को नेशनल क्रिश्चियन पार्टी, गवाही मिशन ट्रस्ट और अन्य नागरिक समूहों की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में कराची भर से परिवार और धार्मिक नेता शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'हमारी बेटियों की रक्षा करो' जैसे नारे लगाए।

अधिकार संगठन ने बताया कि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि कम उम्र की लड़कियों, जिनमें कुछ किशोरावस्था की शुरुआत में हैं, उनका अपहरण किया जा रहा है। उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और उनसे उम्र में काफी बड़े पुरुषों से शादी कराई जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने आगे कहा कि ये घटनाएं न केवल मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हैं, बल्कि बचपन की अवधारणा पर भी एक हमला हैं।

वीओपीएम के अनुसार, एक वक्ता ने कहा, "हम एक शांतिप्रिय समुदाय हैं, लेकिन हमारी बेटियां डर के साये में जी रही हैं।"

उनकी मांगें साफ थीं: "पहले से मौजूद कानूनों को सख्‍ती से लागू किया जाए, जहां कानूनों में कमियां हैं, वहां और सख्‍त कानून बनाए जाए, और हर नागरिक के लिए चाहे वह किसी भी धर्म का हो। सुरक्षा, आस्था और गरिमा के अधिकार को सुनिश्चित किया जाए।"

वीओपीएम ने यह भी बताया कि प्रदर्शनकारियों ने हाल में एक पाकिस्तानी अदालत के विवादास्पद फैसले का जिक्र किया, जिसमें जबरन धर्म परिवर्तन की शिकार 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया की शादी को वैध ठहराया गया था। यह शादी उस मुस्लिम व्यक्ति से कराई गई थी, जिस पर उसका अपहरण करने का आरोप था, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों में डर और अनिश्चितता और बढ़ गई है।

प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से इस फैसले की समीक्षा करने की मांग की और राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की।

कानूनी सुधार के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने 'नैतिक एकजुटता' की भी अपील की ताकि मुस्लिम, ईसाई, हिंदू और सिख समुदाय मिलकर अन्याय के खिलाफ खड़े हो सकें।

वीओपीएम के अनुसार, प्रमुख ईसाई कार्यकर्ता सुल्तान सरदार भट्टी ने कहा, ''हम विशेष अधिकार नहीं मांग रहे हैं। हम सुरक्षा मांग रहे हैं। हर बच्चे के बिना डर के सपने देखने के अधिकार की मांग।''

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम

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