Iran Supreme Leader Statement : ईरान के सर्वोच्च नेता ने लोगों से युद्ध पीड़ितों के सम्मान में पौधे लगाने का किया आग्रह

खामेनेई की अपील- हमलों के जवाब में पेड़ लगाएं, इसे राष्ट्रीय एकता और उम्मीद का प्रतीक बनाएं
ईरान के सर्वोच्च नेता ने लोगों से युद्ध पीड़ितों के सम्मान में पौधे लगाने का किया आग्रह

 

तेहरान, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ईरानी लोगों से अपील की है कि वे अमेरिका-इज़राइल हमलों में मारे गए लोगों की स्मृति में पौधे लगाएं और इसे समृद्धि, आशा और “दुश्मनों” के खिलाफ एक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया का प्रतीक बनाएं।

शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया कि उन्होंने ये बातें दिए गए एक संदेश में कहीं, जो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की स्थापना की 47वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में था। साथ ही यह पारंपरिक अवसर “सिज़दाह बेदार” या “नेचर डे” से पहले दिया गया, जो नवरोज़ त्योहार के समापन का प्रतीक है और 2 अप्रैल को मनाया जाता है।

खामेनेई ने अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ संघर्ष में ईरानी जनता की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि “निर्दयी दुश्मन” अपनी क्रूरता में कोई सीमा नहीं जानते और उन्होंने अपने हमलों में ईरान की प्रकृति और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने सभी ईरानी शहरों और गांवों के लोगों से अपील की कि वे संबंधित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नेचर डे से लेकर वसंत ऋतु के अंत (21 जून) तक पौधे लगाने का अभियान जारी रखें।

28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका ने तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू की।

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है जबकि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ “इज़राइल के प्रॉक्सी” के रूप में लड़ने का आरोप लगाया।

उन्होंने ये टिप्पणियां अमेरिकी जनता को संबोधित एक पत्र में कीं, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इज़रायल के साथ चल रहे युद्ध को लेकर ईरान के रुख को विस्तार से बताया।

पेज़ेशकियन ने कहा, “ईरानी लोग अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों सहित किसी भी अन्य राष्ट्र के प्रति दुश्मनी नहीं रखते।” उन्होंने कहा, “अपने गौरवशाली इतिहास के दौरान बार-बार विदेशी हस्तक्षेप और दबावों का सामना करने के बावजूद ईरानियों ने हमेशा सरकारों और उनके लोगों के बीच स्पष्ट अंतर किया है।”

पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान ने “अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का रास्ता नहीं चुना,” जबकि उसे वैश्विक शक्तियों द्वारा कब्जे, आक्रमण और दबाव का सामना करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि ईरान को खतरे के रूप में प्रस्तुत करना इज़रायल द्वारा गढ़ी गई कहानी है, जिसका उद्देश्य “फिलिस्तीनियों के खिलाफ अपने अपराधों से वैश्विक ध्यान हटाना” है।

पेज़ेशकियन ने ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य जमावड़े और ठिकानों का जिक्र करते हुए कहा कि इन ठिकानों से शुरू हुई अमेरिकी “आक्रामकताएं” यह दिखाती हैं कि ऐसी सैन्य मौजूदगी कितनी खतरनाक हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आने वाले दिनों में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले की धमकी के जवाब में उन्होंने कहा कि देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला सीधे ईरानी जनता को निशाना बनाता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे कदम “युद्ध अपराध” हैं और इनके प्रभाव ईरान की सीमाओं से बाहर तक जाएंगे।

उन्होंने सवाल किया, “क्या ‘अमेरिका फर्स्ट’ वास्तव में आज अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है?”

उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय “एक चौराहे पर खड़ी है,” जहां उसे टकराव और संवाद के बीच चयन करना होगा।

--आईएएनएस

 

 

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