नई दिल्ली: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच होने वाला सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ शुक्रवार को नामंगन के गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में फाइनल वैलिडेशन एक्सरसाइज और क्लोजिंग सेरेमनी के साथ खत्म हुआ।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस अभ्यास ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को मजबूत किया और साथ मिलकर काम करने की क्षमता को बेहतर बनाया।
इस अभ्यास से संयुक्त ऑपरेशन के लिए तैयारी और मजबूत हुई, खासकर गैर-कानूनी हथियारबंद समूहों को खत्म करने जैसे मिशनों के लिए। साथ ही, दोनों देशों की सेनाओं को आतंकवाद से निपटने के तरीकों और अनुभव साझा करने का मौका भी मिला। यह जानकारी भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) ने दी।
‘डस्टलिक’ एक सालाना अभ्यास है, जो हर साल बारी-बारी से भारत और उज़्बेकिस्तान में आयोजित होता है। पिछला अभ्यास अप्रैल 2025 में पुणे के औंध स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में हुआ था।
इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की टुकड़ी में कुल 60 सैनिक शामिल थे, जिनमें 45 भारतीय सेना के जवान (मुख्य रूप से महार रेजिमेंट की एक बटालियन से) और 15 भारतीय वायु सेना के कर्मी थे।
उज़्बेकिस्तान की तरफ से भी करीब 60 सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें उनकी सेना और वायु सेना के जवान शामिल थे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का मकसद सैन्य सहयोग बढ़ाना और मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना है, खासकर पहाड़ी इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन के लिए। इसमें फिटनेस, संयुक्त योजना, सामरिक अभ्यास और विशेष हथियारों के बेसिक कौशल पर ध्यान दिया गया।
यह अभ्यास दोनों सेनाओं के कमांड और कंट्रोल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद करता है, ताकि भविष्य में संयुक्त ऑपरेशन आसानी से प्लान और किए जा सके।
डस्टलिक के दौरान दोनों देशों ने अपने-अपने अनुभव, तकनीक और ऑपरेशन के तरीके साझा किए। इससे दोनों के बीच तालमेल, समझ और साथ काम करने की क्षमता और बेहतर हुई।
इस अभ्यास ने सैनिकों के बीच दोस्ताना माहौल और आपसी भरोसा भी बढ़ाया, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए।
समापन में 48 घंटे का एक फाइनल अभ्यास किया गया, जिसमें संयुक्त ऑपरेशन की तैयारी और क्रियान्वयन को परखा गया। इसका मकसद गैर-कानूनी हथियारबंद समूहों को खत्म करने के लिए तैयार की गई रणनीतियों को जांचना था।
--आईएएनएस
