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नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के लिए देश में ईरान समर्थक शिया समुदायों का बढ़ता विरोध प्रदर्शन एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। सैन्य नेतृत्व के लिए इस उभार को नियंत्रित करना अनिवार्य है, क्योंकि इसके और अधिक व्यापक होने की आशंका है। हालांकि, प्रशासन के समक्ष जटिलता यह है कि वह इस जनसमूह से निपटने के लिए अपनी आधिकारिक मशीनरी का सीधा प्रयोग करने से कतरा रहा है।
पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच बीच-बचाव करने का फैसला किया है और इसलिए उसे सामान्य रहने की जरूरत है। शिया मोबिलाइजेशन के खिलाफ कोई भी सीधी कार्रवाई ईरान के खिलाफ चला जाएगी और पाकिस्तान ऐसा करने से बचना चाहता है।
एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान ने अब इस समस्या से निपटने के लिए अपने प्रॉक्सी को वापस बुला लिया है। पाकिस्तान आर्मी चीफ ने कट्टरपंथी सुन्नी तत्वों और सिपह-ए-सबाह (एसईएस) और जमात-उद-दावा (जेयूडी) के नेताओं को उन शियाओं से निपटने का आदेश दिया है। ये समूह पहले भी पाकिस्तानी सरकार को बचाने के लिए आगे आए हैं। जब जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकाबला करने की बात आई, तो यही समूह सड़कों पर उतर आए थे।
एक अधिकारी ने कहा कि एसईएस और जेयूडी के सदस्यों को आर्मी और आईएसआई का समर्थन है और उन्हें उन लोगों के खिलाफ सड़क पर हिंसा करने की पूरी छूट दी गई है जो सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।
एसईएस एक बैन सुन्नी देवबंदी इस्लामी संगठन है और एक पुरानी राजनीतिक पार्टी है जिसे 1985 में बनाया गया था। यह संगठन सिर्फ पाकिस्तान में शिया असर का विरोध करने के लिए बना था। एसईएस का सांप्रदायिक झगड़ों में शामिल होने का इतिहास रहा है, जिसमें शिया संगठन, शिपाह-ए-मुहम्मद, पाकिस्तान के साथ हिंसा भी शामिल है।
दूसरी ओर, जेयूडी, लश्कर-ए-तैयबा की चैरिटी विंग है। जेयूडी इस्लाम की अहल-ए-हदीस व्याख्या को मानता है, जो वहाबिज्म और सलाफीज्म जैसा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि एसईएस और जेयूडी को शामिल करके, पाकिस्तान के आर्मी चीफ शियाओं की भीड़ को दबाने की कोशिश करेंगे। क्योंकि इन समूहों की कोई जवाबदेही नहीं है, इसलिए हिंसा का दोष सरकार पर नहीं, बल्कि दो अलग-अलग संगठनों पर लगाया जाएगा। अधिकारी ने आगे कहा कि जब पाकिस्तान ईरान से बात करेगा, तो इससे इनकार करने में मदद मिलेगी।
इस तरह की हिंसा की बेशक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी। हालांकि, सरकार एसईएस और जेयूडी पर दोष डालकर बचने की कोशिश करेगी और कहेगी कि उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
एक और अधिकारी ने कहा कि दोनों समूहों को सरकार ने छूट दी है। इसका मतलब है कि वे अपनी मर्जी से काम कर सकते हैं। एक और अधिकारी ने कहा कि ऐसे प्लान से पाकिस्तान में सड़कों पर हिंसा और शियाओं के साथ खूनी झड़पों की उम्मीद की जा सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच बीच-बचाव की कोशिश करके, पाकिस्तान खुद को ताकतवर बनाना चाहता है। पाकिस्तान दो लड़ते हुए देशों के बीच बीच-बचाव की पेशकश करके भूराजनीतिक अहमियत का दावा भी करना चाहता है।
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने यह काम खुद अपने ऊपर ले लिया है और सीधे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत कर रहे हैं। वह कुछ खाड़ी देशों और अमेरिका के साथ अपने संबंधों का भी फायदा उठा रहे हैं।
पाकिस्तान भू-राजनीतिक अहमियत चाहता है, इसलिए वह ईरान के समर्थन में हो रही लामबंदी को आधिकारिक तौर पर कुचलने का खतरा नहीं उठा सकता। अगर पाकिस्तान इस मोड़ पर ईरान को नाराज करता है, तो तेहरान शायद बातचीत के लिए तैयार न हो। एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने और भू-राजनीतिक अहमियत वापस पाने के सपने को चोट पहुंचेगी।
जेयूडी और एसईएस ने पाकिस्तान आर्मी चीफ की बात आसानी से मान ली है। अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों संगठनों का शियाओं के खिलाफ लंबे समय से एजेंडा रहा है और इसलिए फील्ड मार्शल मुनीर का ऑफर उनके लिए बहुत अच्छा है।
--आईएएनएस
केके/एएस