चीनी राजदूत ने भारतीय मित्र को 'जापानी अतिक्रमण विरोधी युद्ध विजय की 80वीं वर्षगांठ' का स्मारक पदक दिया

बीजिंग, 29 अगस्त (आईएएनएस)। हाल ही में, भारत में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने चीन सरकार की ओर से चीन की सहायता करने वाले भारतीय चिकित्सा दल के सदस्य डॉ. बिजॉय कुमार बसु को "चीनी जनता के जापानी अतिक्रमण विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ" का स्मारक पदक प्रदान किया। डॉ. बिजॉय कुमार बसु के उत्तराधिकारी डॉ. सिंह ने डॉ. बसु की ओर से पदक स्वीकार किया।

राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस और डॉ. बिजॉय कुमार बसु के नेतृत्व में भारतीय चिकित्सा दल जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीनी जनता के संघर्ष का समर्थन करने के लिए हजारों किमी. की यात्रा करके चीन आया था, जो चीन-भारत मैत्री का एक स्मारक बना है। चीनी लोग अपने पुराने मित्रों डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस और डॉ. बिजॉय कुमार बसु को कभी नहीं भूलेंगे।

शू फेइहोंग ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ह्वेनसांग की पश्चिम की तीर्थ यात्रा से लेकर रवींद्रनाथ टैगोर की चीन यात्रा तक, और जापानी आक्रमण के विरुद्ध चीन की लड़ाई में डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस और डॉ. बिजॉय कुमार बसु द्वारा दी गई सहायता तक, ये सभी चीन-भारत मैत्री के ऐतिहासिक प्रमाण हैं। चीन और भारत को इन विरासतों को संजोकर रखना चाहिए और इनका विकास जारी रखना चाहिए। साथ ही, हमें साथ मिलकर नए युग में चीन-भारत मैत्री का भविष्य साकार करना होगा। वर्तमान में, टैरिफ युद्ध और व्यापार युद्ध वैश्विक आर्थिक व व्यापार प्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं। एकतरफावाद तथा आधिपत्यवाद अंतर्राष्ट्रीय निष्पक्षता व न्याय के लिए खतरा बन रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता और न्याय की रक्षा के लिए चीन भारत के साथ खड़ा रहेगा और मिलकर 'एशियाई सदी' स्थापित करेगा।

डॉ. सिंह ने कहा कि डॉ. बिजॉय कुमार बसु की ओर से स्मारक पदक स्वीकार करते हुए उन्हें अत्यंत गर्व महसूस हुआ। उन्होंने डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस और डॉ. बिजॉय कुमार बसु को याद करने के लिए चीन सरकार और लोगों का आभार व्यक्त किया। चीन की सहायता करने वाले भारतीय चिकित्सा दल भारत-चीन एकता, शांति एवं मैत्री का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो हमेशा हमारा साझा लक्ष्य रहेगा।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एएस/

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