बांग्लादेश में वकीलों का प्रदर्शन, महिला अधिवक्ता से मारपीट और आपत्तिजनक टिप्पणी पर कार्रवाई की मांग

ढाका, 25 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में महिला वकीलों ने साथी अधिवक्ता के साथ हुई कथित मारपीट और आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई। प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जुड़े दो वकीलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

‘जनरल लॉयर्स’ के बैनर तले आयोजित यह मानव श्रृंखला प्रदर्शन रविवार को नारायणगंज जिला जज कोर्ट परिसर में हुआ। प्रदर्शनकारियों ने नारायणगंज सिटी बीएनपी के सदस्य सचिव अबु अल यूसुफ खान टीपू और वकील रफीकुल अहमद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन में जातीयताबादी आइनजीबी (एनजीओ) फोरम की जिला इकाई की संयुक्त संयोजक शमसुन नूर बंधन, पीड़ित वकील अमीना अख्तर शिल्पी समेत कई अधिवक्ता शामिल हुए।

पीड़िता शिल्पी ने आरोप लगाया कि अदालत परिसर से फेरीवालों को हटाने के मुद्दे पर रफीकुल अहमद के साथ बहस हुई थी। उनके अनुसार, “बहस के दौरान एक समय ऐसा आया कि रफीकुल ने मुझ पर हमला कर दिया। बाद में एडवोकेट अबू अल यूसुफ खान टीपू भी शामिल हो गए और मुझे मुक्का मारा।”

शिल्पी ने कहा कि उन्होंने बार-बार स्पष्ट किया था कि फेरीवालों को हटाने का आदेश बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव ने दिया था और इस कार्रवाई में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब टीपू ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कथित तौर पर महिला वकीलों को “डांसर्स” कह दिया।

शमसुन नूर बंधन ने बार एसोसिएशन नेतृत्व और बीएनपी के केंद्रीय नेतृत्व से मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।

यूनीसेफ ने पिछले सप्ताह कहा था कि 2026 में बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती यौन और क्रूर हिंसा की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि देश में लैंगिक और बाल हिंसा रोकने के उपायों को और मजबूत करने की तत्काल जरूरत है।

बांग्लादेश में यूनिसेफ प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने कहा, “अपराधियों को सजा न देने की संस्कृति खत्म होनी चाहिए और संस्थागत सुरक्षा, बाल-अनुकूल पुलिस और न्याय व्यवस्था, सामुदायिक सुरक्षा तथा सामाजिक सेवाओं की कमियों को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।”

इस महीने की शुरुआत में अवामी लीग ने भी कहा था कि बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है और यह अब केवल “महिलाओं का मुद्दा” नहीं बल्कि “शासन, न्याय और राष्ट्रीय चरित्र का संकट” बन चुका है।

--आईएएनएस

केआर/

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