बांग्लादेश के पूर्व मंत्री की अपील, 'अवामी लीग से हटाया जाया बैन'

ढाका, 28 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और अवामी लीग के नेता मोहम्मद अली अराफात ने अपनी पार्टी पर लगी पाबंदी को तुरंत हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहुलवाद और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए संसदीय चुनाव “पहले से तय और धांधली वाले” थे और वो लोकतांत्रिक तरीके से अंजाम नहीं दिए गए।

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अराफात ने पोस्ट किया: “चीजों को सही नजरिए से देखने के लिए, यूके में लेबर पार्टी या कंजर्वेटिव पार्टी के बिना चुनाव की कल्पना करें—क्या आप उसे असली चुनाव कहेंगे? इसी तरह, यूएसए के मामले में, अगर रिपब्लिकन पार्टी या डेमोक्रेटिक पार्टी के बिना चुनाव होते, तो आप उसे क्या कहेंगे?”

उन्होंने आगे कहा, “खासकर अगर किसी पार्टी पर गैर-कानूनी तरीके से बैन लगा दिया जाता है या उसे चुनाव से बाहर कर दिया जाता है, तो क्या ऐसे चुनाव को स्वतंत्र और पारदर्शी माना जा सकता है? फरवरी 2026 में बांग्लादेश में ठीक यही हुआ था।”

अराफात ने आगे कहा कि बांग्लादेश के बड़े सियासी दलों में से एक, अवामी लीग पर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम प्रशासन ने “गैर-कानूनी तरीके से” बैन लगा दिया था और उसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था, जिससे लाखों वोटरों को वोट देने का हक छीन लिया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “अवामी लीग पर बैन अभी भी लगा हुआ है, जिससे वह राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पा रही है”, “चुनाव में वोट देने का अधिकार तक लोगों से छीन लिया गया, और बांग्लादेश में इकट्ठा होने, अपनी बात रखने और अपनी आवाज उठाने के अधिकारों को लगातार दबाया जा रहा है”।

पार्टी के खिलाफ की गई कार्रवाई पर चिंता जताते हुए, अराफात ने कहा कि हजारों अवामी लीग नेताओं और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को “मनगढ़ंत हत्या” और दूसरे आपराधिक मामलों में टारगेट किया जा रहा है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर लोगों को जेल हो रही है।

उन्होंने कहा, “कई लोगों को गलत तरीके से जमानत नहीं दी जाती है, और जब जमानत मिल भी जाती है, तो उन्हें अक्सर फिर से गिरफ्तार कर लिया जाता है और सत्ता का खुलेआम गलत इस्तेमाल करते हुए जेल के गेट पर हिरासत में ले लिया जाता है। यह चरणबद्ध तरीके से की गई प्रताड़ना न केवल गलत है, बल्कि सत्ता विरोधी आवाजों को दबाने और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश भी है।”

अराफात ने कहा कि अवामी लीग ने जुलाई-अगस्त 2024 संकट को लेकर निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की वकालत की है।

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के यूनुस प्रशासन ने जुलाई-अगस्त की घटनाओं का इस्तेमाल "एक सियासी टूल की तरह किया था। उस दौर में जो कुछ भी हुआ उसको लेकर जवाबदेही पक्की करने की बजाय अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को दबाने और झूठे मर्डर केस में फंसाने के लिए हथियार की तरह इस्तेमाल किया।"

यूएन की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट का हवाला देते हुए, अराफात ने कहा कि 2024 की अशांति के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए, जबकि अवामी लीग विरोधी पॉलिटिकल पार्टियों ने अपनी "सियासी बयानबाजी" में 2,000 तक के आंकड़े बताए हैं। हालांकि, असल में, उन्होंने दावा किया कि जुलाई-अगस्त की हिंसा से पीड़ितों के लगभग 800 वेरिफाइड नामों की पहचान की गई है।

अराफात ने कहा, "यह पता लगाने के लिए कोई पूरी जांच नहीं की गई है कि इन लोगों की हत्या कैसे हुई या कौन जिम्मेदार था। इसके बजाय, उस समय की अवामी लीग सरकार पर सारा दोष मढ़ने के लिए पॉलिटिकल बयानबाजी जारी है।"

यह कहते हुए कि बांग्लादेश में मौजूदा हालात "डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स या कानून के राज के किसी भी भरोसेमंद स्टैंडर्ड" से बहुत कम हैं, अवामी लीग नेता ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए; उन्हें चुप नहीं रहना चाहिए।”

--आईएएनएस

केआर/

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