अमेरिका-ईरान मध्यस्थता में पाकिस्तान की कूटनीतिक छवि पर संदेह, ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में दावा

कैनबरा, 21 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में काफी समर्थन मिला, जिससे यह धारणा मजबूत हुई कि इस्लामाबाद अमेरिका-ईरान वार्ता के लिए एक अहम केंद्र बनकर उभरा है। हालांकि, बाद में सामने आए घटनाक्रमों ने इन दावों की सटीकता और टिकाऊपन पर सवाल खड़े कर दिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित प्रक्रिया के कई प्रमुख पहलू जमीन पर आकार लेने में नाकाम रहे।

‘द ऑस्ट्रेलिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, काफी समय से पाकिस्तान की मौजूदा डिप्लोमैटिक पोजीशन को वाशिंगटन में पाकिस्तानी सैन्य की पेड लॉबिंग का नतीजा माना जा रहा था।

इस मामले में ड्रॉपसाइट न्यूज की कवरेज का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि इसके बाद जो हुआ वह बढ़ते डिप्लोमैटिक असर की एक सावधानी से बनाई गई कहानी थी, जो अंदरूनी पॉलिटिकल इंजीनियरिंग, बदलते गठबंधनों और बाहर से प्रभावित रणनीतिक पोजीशनिंग की ज्यादा मुश्किल सच्चाई के साथ अजीब तरह से बैठती है।

ड्रॉप साइट न्यूज का जिक्र करते हुए, ऑस्ट्रेलिया टुडे ने कहा कि यह पैटर्न एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है जिसमें पाकिस्तान के संदिग्ध सिक्योरिटी सिस्टम ने वाशिंगटन और पश्चिमी मीडिया इकोसिस्टम में कहानियों को आकार देने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाया है, जबकि असल डिप्लोमैटिक नतीजे अभी भी अनिश्चित हैं।

ड्रॉपसाइट न्यूज के अनुसार, पाकिस्तान इस पॉइंट पर कैसे पहुंचा, यह अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के लंबे रास्ते से जुड़ा है, जिसमें "बदलती रणनीतिक जरूरतें, सिविलियन गवर्नेंस में मिलिट्री का असर और तालमेल और मनमुटाव के बार-बार आने वाले चक्र" शामिल हैं।

इसमें कहा गया है कि 2022 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को हटाना एक अहम मोड़ था। इसके बाद पाकिस्तान की विदेश नीति पश्चिमी साझेदारों के साथ भरोसा वापस लाने और चीन और खाड़ी देशों के साथ प्रैक्टिकल संबंध बनाए रखने पर ज्यादा केंद्रित हो गई।

ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि चीन के साथ पाकिस्तान के संबंध में तनाव साफ दिख रहा है, जिसमें बेल्ट एंड रोड के जरूरी प्रोजेक्ट्स में देरी के साथ-साथ सुरक्षा और रीपेमेंट के मुद्दों पर बढ़ते झगड़े शामिल हैं। चीन और पाकिस्तान के संबंध को अक्सर “ऑल-वेदर” कहा जाता है। इस डेवलपमेंट ने इस्लामाबाद को अपनी डिप्लोमैटिक अहमियत बढ़ाने के लिए और बढ़ावा दिया है, खासकर वाशिंगटन में।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इस बैकग्राउंड में, अमेरिका-ईरान कूटनीति में एक सेंट्रल मीडिएटर के तौर पर पाकिस्तान की छवि एक बिना किसी मुकाबले की कूटनीतिक कामयाबी से ज्यादा, ओमान, तुर्किए, सऊदी अरब और चीन जैसे भीड़-भाड़ वाले और कॉम्पिटिटिव मीडिएशन माहौल में भू-राजनीतिक विजिबिलिटी हासिल करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा लगती है।”

--आईएएनएस

केके/डीएससी

Related posts

Loading...

More from author

Loading...