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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ समझौता वार्ता की टेबल पर बैठने से ईरान के इनकार ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव के बावजूद दोनों पक्ष सीजफायर की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। विदेशी मामलों के जानकार अशोक सज्जनहार ने ऐसे ही कई महत्वपूर्ण विषयों पर बात की।
अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर पाकिस्तान में होने वाली समझौता वार्ता में ईरान ने शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। ईरान ने इस्लामाबाद में अपने प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने की खबरों को पूरी तरह गलत बताया।
फॉरेन एक्सपर्ट अशोक सज्जनहार ने कहा कि इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत कुछ रुकावटों और परेशानियों की वजह से थोड़ी देर से हो सकती है। लेकिन मेरा मानना है कि जैसे अमेरिका चाहता है, वैसे ही ईरान भी जल्द से जल्द सीजफायर (युद्धविराम) चाहता है। मुझे लगता है कि शनिवार सुबह होने वाली बैठक जरूर होगी। उसके बाद हमें माहौल को समझना होगा। बातचीत कैसी रही और आगे कैसे बढ़ती है, लेकिन पहली ही बैठक से बहुत बड़े नतीजों की उम्मीद करना ठीक नहीं होगा। अभी सबसे जरूरी है कि बैठक हो जाए।
सज्जनहार ने कहा कि इस समय मुख्य ध्यान इन बातों पर होना चाहिए, जैसे होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और वहां रुकावटें खत्म करना। आगे कोई हमला न हो चाहे ईरान की तरफ से इजरायल या खाड़ी देशों पर या इजरायल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर। ये सबसे अहम मुद्दे हैं, बाकी बातों पर बाद में चर्चा हो सकती है।
सज्जनहार ने जयशंकर की यात्रा का रणनीतिक महत्व बताते हुए कहा कि एस. जयशंकर की मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। मॉरीशस में इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस हो रही है, जहां भारत एक बड़े सुरक्षा सहयोगी के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाता है। जहां तक यूएई की बात है, भारत के उसके साथ रिश्ते पिछले दस वर्षों में बहुत मजबूत हुए हैं। यूएई भारत को तेल सप्लाई करने वाला एक बड़ा देश है। यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट भी है और एक बड़ा निवेशक भी है। वहां 30 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। यूएई एक ऐसे इलाके में है, जहां अक्सर तनाव रहता है, इसलिए यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
सज्जनहार ने कहा कि भारत इस पूरे क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी कतर का दौरा किया। भारत की एलपीजी (रसोई गैस) की बड़ी जरूरत खाड़ी देशों, खासकर कतर से पूरी होती है। इस तरह की यात्राओं का मकसद रिश्तों को मजबूत करना, वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और न सिर्फ इन देशों से बल्कि बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और दूसरे देशों से भी बिना रुकावट एनर्जी सप्लाई बनाए रखना है।
लेबनान में तनाव के असर को लेकर सज्जनहार ने कहा कि लेबनान को लेकर अलग-अलग राय हैं। अमेरिका और इजरायल का कहना है कि इजरायल सीजफायर का हिस्सा नहीं है, जबकि ईरान और पाकिस्तान कुछ और कहते हैं। कुछ यूरोपीय देश मानते हैं कि लेबनान को भी इसमें शामिल होना चाहिए। असल में लेबनान एक अलग देश है। वहां हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष अक्टूबर 2023 से चल रहा है, जो हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था। इस संघर्ष को 28 फरवरी से शुरू हुए नए युद्ध से अलग रखना चाहिए। मेरी समझ से सीजफायर मुख्य रूप से इन बातों पर केंद्रित है: इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर हमले, ईरान की ओर से इजरायल पर हमले, खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले, क्षेत्र की आर्थिक और आम नागरिकों से जुड़ी जगहों पर हमले।
विक्रम मिस्री की अमेरिका यात्रा को लेकर सज्जनहार ने कहा कि विक्रम मिस्री की वॉशिंगटन डीसी यात्रा का मकसद भारत-अमेरिका रिश्तों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना था। अमेरिका भारत के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार है चाहे टेक्नोलॉजी हो, रक्षा हो या व्यापार। वहां रहने वाला भारतीय समुदाय भी काफी प्रभावशाली है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दुनिया में चल रहे संघर्षों के बावजूद भारत-अमेरिका के रिश्ते और साझेदारी पटरी पर बने रहें और इन पर कोई असर न पड़े।
--आईएएनएस
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