मुंबई, 9 जून (आईएएनएस)। सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन सदा सरवणकर ने बताया कि 500 करोड़ रुपए का रिडेवलपमेंट प्लान कई चरणों में पूरा किया जाएगा। इसमें पार्किंग, एंट्री गेट और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना शामिल है।
सदा सरवणकर ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना, यातायात व्यवस्था को सुगम करना तथा श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सदा सरवणकर ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बताया कि जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे, तब सिद्धिविनायक मंदिर परिसर के पुनर्विकास के लिए धनराशि की मांग की गई थी।
उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिसके कारण यातायात, पार्किंग और अन्य सुविधाओं को लेकर कई चुनौतियां सामने आती हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए राज्य सरकार से विशेष वित्तीय सहायता की मांग की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीएमसी को इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना की योजना उसी कंपनी ने तैयार की है, जिसने उज्जैन स्थित महाकाल लोक कॉरिडोर और उससे जुड़े विकास कार्यों का डिजाइन तैयार किया था। इसी तर्ज पर सिद्धिविनायक मंदिर परिसर को भी आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना बनाई गई है।
सदा सरवणकर ने कहा कि मुंबई महानगरपालिका ने इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा करने का निर्णय लिया है। पहले चरण में मंदिर परिसर के निकट लगभग 120 वाहनों की क्षमता वाली अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार का सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण किया जाएगा। इस चरण में परिसर की फ्लोरिंग, ऊपरी संरचनाओं का विकास, दीवारों की मरम्मत और अन्य बुनियादी सुधार कार्य भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पहले चरण के कार्यों पर लगभग 80 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस कार्य के लिए मुंबई महानगरपालिका ने निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है और टेंडर जारी किया जा चुका है। परियोजना का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा किया गया था। सरवणकर ने उम्मीद जताई कि इस चरण का कार्य शुरू हो चुका है और इसे लगभग एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पहले चरण के पूरा होने के बाद दूसरे और तीसरे चरण के विकास कार्यों की शुरुआत की जाएगी। इन चरणों में मंदिर परिसर के आसपास की आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, लेकिन वर्तमान अनुमान के अनुसार प्रमुख विकास कार्यों को पूरा करने में लगभग 150 करोड़ रुपए का खर्च आ सकता है।
--आईएएनएस
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