परियोजनाओं के माध्यम से आय के स्रोत शुरू कर ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ बनने की दिशा में कार्य करना होगा: विवेक भारद्वाज

परियोजनाओं के माध्यम से आय के स्रोत शुरू कर ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ बनने की दिशा में कार्य करना होगा: विवेक भारद्वाज

गांधीनगर, 9 जून (आईएएनएस)। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने गांधीनगर में आयोजित 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' वर्कशॉप में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए अब पंचायतों को विभिन्न स्थानीय परियोजनाओं के माध्यम से आय के स्रोत सृजित कर आत्मनिर्भर पंचायत बनने की दिशा में कार्य करना होगा। ये प्रोजेक्ट्स साकार करने के लिए पंचायत मंत्रालय द्वारा विभिन्न तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, नवीन तथा विकासोन्मुखी बनाना है।

प्रधानमंत्री मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के दूरदर्शी विजन को साकार करने के मजबूत कदम के रूप में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को गांधीनगर स्थित होटल लीला में एक दिवसीय राज्य स्तरीय आउटरीच वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप में गुजरात के पंचायत विभाग के प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

भारद्वाज ने आगे कहा कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने केवल अपनी आवश्यकताएं पूरी नहीं की थीं, अपितु ‘वैक्सीन मैत्री’ अभियान द्वारा लगभग 96 देशों को करोड़ों वैक्सीन डोज भी भेजे थे। इसी आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए अब पंचायतों को भी विभिन्न स्थानीय परियोजनाएं शुरू कर आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

उन्होंने जोड़ा कि भारत की स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती वर्ष बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहे थे। देश विभाजन, युद्धों, अकाल तथा अनाज की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से गुजरा था, जिसके कारण भारत को विदेशी सहायता पर निर्भर रहना पड़ता था, परंतु समय के साथ देश ने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठाए। वर्ष 2003 में भारत ने अधिकांश विदेशी सहायता लेना बंद किया और अफ्रीका के कुछ देशों का ऋण भी माफ किया।

उन्होंने कहा कि पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधनों एवं विशेषताओं से आर्थिक उपार्जन प्राप्त करना चाहिए। इंडियन स्टैंडर्ड टाइम रेखा, कर्कवृत्त, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी या समुद्र तट जैसे स्थानों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उचित आयोजन तथा नवीन विचारधारा द्वारा पर्यटन एवं अन्य गतिविधियों से बड़ी आय और रोजगार का सृजन किया जा सकता है। इस प्रकार, पंचायतें सरकार के अनुदान पर निर्भर रहने के स्थान पर अपने संसाधनों के आधार पर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनेंगी। हमारे देश में ऐसी अनेक ग्राम पंचायतें और ब्लॉक पंचायतें हैं, जिनके प्रोजेक्ट्स वर्तमान में भी अच्छी आय सृजित कर रहे हैं।

पंचायत विभाग के प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी ने कहा कि केंद्र के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' के अंतर्गत गुजरात की 71 पंचायतें 'आत्मनिर्भर पंचायत' के रूप में चयनित हुई हैं, जो गौरव समान है, परंतु हमें 71 पंचायतों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात की सभी 14 हजार से अधिक पंचायतों को 'आत्मनिर्भर पंचायत' बनाने के लिए संयुक्त प्रयास करने हैं। हमारी शासन व्यवस्था में सबसे ऊपर केंद्र, बीच में राज्य तथा सबसे नीचे लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट, अर्थात स्थानीय निकाय संस्थान हैं। प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत-2047' का सपना केवल केंद्र या राज्य सरकारों के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता, जब तक कि जिला, तहसील तथा ग्राम पंचायतें समान गति एवं ऊर्जा के साथ इस दौड़ में सहभागी न हों।

द्विवेदी ने कहा कि पंचायतें केवल 'प्रशासनिक इकाइयां' नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जीवंत इकाइयां हैं। पंचायतें केंद्र या राज्य की ओर प्राप्त होने वाले अनुदान का उपयोग करने और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली इकाई होने के साथ-साथ लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला हैं। ग्रामीण स्तर से ही नेतृत्व तैयार होकर राज्य तथा राष्ट्र स्तर तक पहुंचता है और देश के विकास में अपना योगदान देता है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि ग्रामीण स्तर पर सुविधाएं शहर जैसी होनी चाहिए। आज के ग्रामीण नागरिक की भी ऊंची आकांक्षाएं-अपेक्षाएं होती हैं। अहमदाबाद जैसे विकसित शहरों में जिस तरह की सुविधाएं उपलब्ध हों, वैसी ही 'क्वालिटी ऑफ लाइफ'-सुविधाएं गांवों के नागरिकों को भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल सरकारी ग्रांट की सीमा में रहकर काम करना एक 'मैनेजर' का कार्य है, जबकि अपनी सीमाओं से बाहर आकर गांव को आत्मनिर्भर बनाना एक 'लीडर' का कार्य है। हमें आत्मनिर्भर पंचायत का दायरा बढ़ाना होगा। केन्द्र सरकार की इस योजना में भले ही प्रारंभ में कुछ मानदंड, जैसे कि ग्राम पंचायत की आय 50 लाख रुपए या तहसील की 1 करोड़ रुपए के आधार पर गुजरात की 71 पंचायतों का ही प्राथमिक चयन हुआ हो, लेकिन यह विचार केवल वहीं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि कोई पंचायत आज 49 लाख रुपए या 95 लाख रुपए पर है, तो वह कुछ और प्रयासों से इस लक्ष्य को पार कर सकती है। प्रधान सचिव ने आत्मनिर्भरता के इस मंत्र को गुजरात की सभी 14 हजार से अधिक पंचायतों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

उन्होंने जोड़ा कि यह एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, अपितु पंचायत को आत्मनिर्भर बनाने का एक 'जीवंत विचार' है। 20 वर्ष बाद भारत देश जब अपना अमृत काल यानी कि अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब प्रत्येक सरपंच, पटवारी और अधिकारी गर्व से कह सकेगा कि राष्ट्र निर्माण में उसके गांव तथा क्षेत्र का भी अमूल्य योगदान रहा है।

इस अवसर पर अपर विकास आयुक्त डॉ. गौरव दहिया ने कहा कि गुजरात में ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ का प्रारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों की अपनी आय में वृद्धि कर उन्हें केवल केन्द्र और राज्य के अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनाना है। इस कार्यक्रम अंतर्गत हाल में गुजरात में 71 ग्राम पंचायतों का ‘आत्मनिर्भर पंचायत’ के रूप में प्राथमिक चयन किया गया है।

दहिया ने आगे कहा कि जैसे शहरी स्थानीय निकाय संस्थान मजबूत बजटिंग तथा स्वतंत्र आय स्रोतों के माध्यम से सफलतापूर्वक कार्यरत हैं, उसी प्रकार ग्राम पंचायतों को भी मजबूत वित्तीय प्रबंधन की ओर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य की सभी 14,650 ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बनें; ऐसे दूरदृष्टिपूर्ण लक्ष्य के साथ यह पहल शुरू की गई है। केंद्र-राज्य सरकार तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बोर्ड (नाबार्ड) के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास में नई दिशा स्थापित करेगा तथा स्थानीय निकाय संस्थानों को अधिक सशक्त, उत्तरदायी और विकासोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नाबार्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. प्रदीप ने कहा कि इस संस्थान द्वारा ग्रामीण विकास, कृषि समृद्धि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, बाजार, पानी की सुविधाओं और अन्य ढांचागत विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रसार, जल संचय तथा सिंचाई सुविधाओं के विकास द्वारा किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के अनेक सफल प्रयोग शुरू किए गए हैं। इस प्रकार, नाबार्ड के इन प्रयासों से गांवों में कनेक्टिविटी, रोजगार तथा आर्थिक विकास को नई दिशा मिली है।

उन्होंने आगे कहा कि नाबार्ड ने सहकारिता क्षेत्र, जिला सहकारी बैंकों, कृषि उत्पादक संगठनों और महिला स्वयंसहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए भी विशेष कार्य किए हैं। ग्राम पंचायतें अपनी आय के स्रोत विकसित कर सकें; इसके लिए नाबार्ड द्वारा विभिन्न विकास योजनाएं और डीपीआर तैयार किए गए हैं।

ग्राम हाट, फिल्टर किए गए पेयजल की सुविधा, कृषि उत्पादों का संग्रह तथा प्रोसेसिंग, छोटे उद्योग, गोदाम निर्माण एवं कमोडिटी आधारित व्यवसाय जैसे मॉडलों द्वारा ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जोड़ा कि ऐसे आय-आधारित प्रयोगों से ग्राम पंचायतें केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के स्थान पर अपने संसाधनों द्वारा विकास कार्यों को गति दे सकेंगी और गाँवों में सर्वांगीण विकास का नया मॉडल स्थापित कर सकेंगी।

इस अवसर पर आवास एवं शहरी विकास निगम (हडको) लिमिटेड के अधिकारी विमल कुमार शर्मा ने कहा कि ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक ढांचागत सुविधाएं, टेक्निकल मार्गदर्शन और वित्तीय आयोजन में सहयोग देने के लिए हडको पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इस संस्थान ने हाल ही में शहरी स्थानीय निकाय संस्थानों के लिए सफलतापूर्वक विभिन्न विकास कार्यक्रम लागू किए हैं और अब उसी दिशा में ग्राम पंचायतों के लिए भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। संस्थान द्वारा ग्राम पंचायतों को आय के स्रोत प्राप्त हों, ऐसे प्रोजेक्ट्स तैयार करने, उनकी तकनीकी व्यावहारिकता निर्धारित करने, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने तथा वित्तीय संस्थानों से फंडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और विशेषज्ञ सहायता प्रदान की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, हडको द्वारा ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए टेक्निकल, वित्तीय तथा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट संबंधी वर्कशॉप, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विशेष सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा। शर्मा ने जोड़ा कि आत्मनिर्भर पंचायत के विजन को साकार करने के लिए ग्राम पंचायतें अपनी आय सृजित कर सकें, लाभकारी तथा टिकाऊ प्रोजेक्ट्स विकसित कर सकें और विकास कार्यों को स्वयं आगे बढ़ा सकें; इसके लिए सभी प्रकार का मार्गदर्शन तथा सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

वर्कशॉप के दौरान आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के विजन, उद्देश्यों, टेक्निकल रोडमैप और अपेक्षित परिणामों की विस्तृत जानकारी दी गई। आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया तथा सहभागियों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर, पंचायती राज मंत्रालय के अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, तहसील विकास अधिकारी, पटवारी-कम-मंत्री, सरपंच, और नाबार्ड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य की ग्राम एवं तहसील पंचायतों के अधिकारी-पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

--आईएएनएस

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