कोलकाता, 9 जून (आईएएनएस)। कोलकाता में इस्कॉन के प्रवक्ता राधारमण दास ने भगवान जगन्नाथ, दीघा जगन्नाथ मंदिर, रथ यात्रा और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ के सभी भक्त हैं और जो भी सनातन धर्म के लिए काम करता है, उसका योगदान सराहनीय है।
राधारमण दास ने आईएएनएस से कहा कि ममता बनर्जी ने दीघा में भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर बनवाया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता आए थे, तब उन्होंने भी इस विशाल मंदिर के निर्माण की सराहना की थी।
राधारमण दास ने भगवान जगन्नाथ की पवित्र स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष स्नान पूर्णिमा 29 जून को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का विशेष स्नान कराया जाता है। इसके बाद माना जाता है कि अत्यधिक स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और अगले 14 दिनों तक भक्तों को दर्शन नहीं देते।
उन्होंने बताया कि रथ यात्रा से एक दिन पहले भगवान पुनः भक्तों को दर्शन देते हैं और फिर अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं। इस दौरान वे सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। राधारमण दास ने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने से व्यक्ति की चौदह पीढ़ियों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
रथ यात्रा की वैश्विक पहचान पर बात करते हुए इस्कॉन प्रवक्ता ने कहा कि इस परंपरा को पूरी दुनिया में पहुंचाने का श्रेय इस्कॉन के संस्थापक-आचार्य श्रील प्रभुपाद को जाता है। जब प्रभुपाद विदेश गए थे, तब उन्होंने सबसे पहले भगवान बलदेव, सुभद्रा और जगन्नाथ की मूर्तियों की स्थापना की थी। इसके बाद दुनिया के विभिन्न देशों में रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत हुई। पुरी के बाद कोलकाता की रथ यात्रा को सबसे बड़ी रथ यात्राओं में गिना जाता है।
दीघा जगन्नाथ मंदिर के नाम को लेकर हुए विवाद पर भी राधारमण दास ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मंदिर के उद्घाटन के समय इसका नाम 'जगन्नाथ धाम दीघा' रखा गया था, लेकिन ओडिशा के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि 'धाम' शब्द केवल पुरी के लिए इस्तेमाल होना चाहिए, क्योंकि जगन्नाथ धाम पुरी का धार्मिक महत्व बेहद विशेष है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर ओडिशा के लोगों में लंबे समय से नाराजगी थी। अब इस विवाद का समाधान हो गया है और सीएम सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि मंदिर के नाम से 'धाम' शब्द हटाकर उसकी जगह 'मंदिर' जोड़ा जाएगा। राधारमण दास ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ओडिशा के श्रद्धालु निश्चित रूप से खुश होंगे और उन्होंने इस मामले में त्वरित पहल के लिए सुवेंदु अधिकारी का धन्यवाद भी किया।
--आईएएनएस
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