फ्रांस में दिखेगी समुद्र से लेकर हाइपरलूप ट्रेन तक भारतीय तकनीक की झलक

फ्रांस में दिखेगी समुद्र से लेकर हाइपरलूप ट्रेन तक भारतीय तकनीक की झलक

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। एक ऐसी ट्रेन की जो लगभग निर्वात वातावरण में सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़े, ऐसे हीरे जिनके भीतर अदृश्य पहचान चिह्न छिपे हों, समुद्र के भीतर जाकर खुद निरीक्षण करने वाले रोबोट व कम संसाधनों में भी बड़े काम करने वाली एआई तकनीक यह सब कुछ फ्रांस में देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि ये सभी टेक्नोलॉजी भारतीय हैं और भारत की ओर से ही यहां प्रदर्शित की जा जानी हैं।

यह आयोजन 14 से 16 जून तक होना है। आईआईटी मद्रास अपने 15 नवाचार-आधारित स्टार्टअप्स और कई रणनीतिक अनुसंधान परियोजनाओं के साथ यहां भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा।

खास बात यह है कि आयोजन के 13 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में से दो का नेतृत्व भी आईआईटी मद्रास ही कर रहा है। आईआईटी मद्रास का हाइपरलूप कार्यक्रम विशेष चर्चा में है।

रेल मंत्रालय द्वारा हाइपरलूप तकनीक के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त संस्थान ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भविष्य में यही तकनीकें तेज रफ्तार माल परिवहन और शहरी यातायात को नई दिशा दे सकती हैं। समुद्री क्षेत्र में एक नवाचार प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या का समाधान प्रस्तुत कर रहा है।

समुद्री शैवाल से तैयार की जा रही यह नई जैविक सामग्री पारंपरिक प्लास्टिक का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकती है। यह सामग्री न केवल सूक्ष्म प्लास्टिक से मुक्त है बल्कि मौजूदा औद्योगिक उत्पादन प्रणालियों में आसानी से उपयोग की जा सकती है। संचार तकनीक के क्षेत्र में आईआईटी मद्रास भविष्य की 6जी दुनिया की झलक दिखाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि 6जी केवल तेज इंटरनेट का नाम नहीं होगा, बल्कि यह बुद्धिमान मशीनों, स्वचालित प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं का आधार बनेगा। यहां प्रयोगशाला में विकसित हीरों से जुड़ी टेक्नोलॉजी भी होगी।

वैज्ञानिकों ने ऐसी लेजर प्रणाली विकसित की है जो हीरे के भीतर अदृश्य क्यूआर कोड या विशेष पहचान चिह्न अंकित कर सकती है। इससे हीरों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने और नकली उत्पादों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए विकसित स्मार्ट तकनीकें भी इस प्रदर्शनी का हिस्सा होंगी। इंटेलीजेंट माल प्रबंधन, पूर्वानुमान आधारित रखरखाव, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों के माध्यम से भारतीय बंदरगाहों को अधिक दक्ष, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि का मानना है कि यह आयोजन भारत और फ्रांस के बीच अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा। वहीं संस्थान के वैज्ञानिकों का विश्वास है कि यह मंच भारतीय स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएसएच