नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून का ऐतिहासिक परिसर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य मित्रता और नेतृत्व निर्माण की अनूठी कहानी का साक्षी बनने जा रहा है। 13 जून को होने वाली पासिंग आउट परेड के साथ यहां न केवल भारतीय कैडेट अधिकारी बनकर देश की सेवा के लिए तैयार होंगे, बल्कि मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट भी अपने-अपने राष्ट्रों में सैन्य नेतृत्व की नई जिम्मेदारियां संभालने के लिए कदम बढ़ाएंगे।
अफ्रीकी देशों लेसोथो और केन्या से आए विदेशी अधिकारी कैडेटों के लिए आईएमए का सफर केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा। यह अनुभव नेतृत्व, अनुशासन, साहस, मित्रता और साझा मूल्यों की ऐसी यात्रा बन गया, जिसने उनके व्यक्तित्व और सैन्य दृष्टिकोण को नई दिशा दी।
लेसोथो से आए अधिकारी कैडेट ने पासिंग आउट परेड से पहले अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आईएमए में बिताया गया समय उनके जीवन का सबसे परिवर्तनकारी दौर रहा है। कठोर सैन्य प्रशिक्षण, चुनौतीपूर्ण अभ्यास, शारीरिक और मानसिक मजबूती की परीक्षा तथा नेतृत्व विकास के अवसरों ने उन्हें एक बेहतर सैनिक और जिम्मेदार नेता बनने में मदद की है।
उन्होंने बताया कि अकादमी में विभिन्न राज्यों, संस्कृतियों और देशों से आए कैडेटों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। इससे न केवल सैन्य ज्ञान बढ़ा बल्कि विभिन्न संस्कृतियों को समझने और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने का मौका भी मिला।
उन्होंने कहा कि आईएमए ने उन्हें यह सिखाया कि एक सफल सैन्य अधिकारी केवल युद्ध कौशल से नहीं, बल्कि चरित्र, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता से पहचाना जाता है।
वहीं, केन्या से आए अधिकारी कैडेट ने भी आईएमए में अपने अनुभवों को जीवनभर याद रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि अकादमी में हर दिन नई चुनौतियां लेकर आता था, लेकिन इन्हीं चुनौतियों ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी, सक्षम और जिम्मेदार बनाया। कठिन प्रशिक्षण, सामूहिक अभ्यास और साथी कैडेटों के साथ बिताए गए क्षणों ने उनके भीतर भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि भारत में प्राप्त प्रशिक्षण और अनुभव भविष्य में उनकी सैन्य सेवा में अमूल्य साबित होंगे। उनके अनुसार आईएमए में सीखे गए नेतृत्व, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता के सिद्धांत उन्हें अपने देश की सेना में बेहतर योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे।
दरअसल, विदेशी कैडेटों की ये यात्राएं केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों की कहानी नहीं हैं, बल्कि भारत और उनके देशों के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का भी प्रतीक हैं। केन्या और भारत के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से विश्वास, सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहा है।
आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले केन्याई कैडेट इस सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी प्रकार लेसोथो जैसे मित्र देशों के सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर भारत न केवल अपनी सैन्य विशेषज्ञता साझा कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर पेशेवर सैन्य नेतृत्व के विकास में भी योगदान दे रहा है।
वर्षों से आईएमए दुनिया के अनेक देशों के कैडेटों को प्रशिक्षित करता रहा है और इसने अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग का एक मजबूत मंच तैयार किया है। 13 जून को जब चेतवुड भवन की पृष्ठभूमि में पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन होगा और कैडेट अंतिम पग भरकर अधिकारी बनने की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे, तब उसमें भारत के साथ-साथ अफ्रीका के इन युवा सैन्य नेताओं के सपने भी साकार होंगे। आईएमए की यही विशेषता उसे दुनिया की प्रतिष्ठित सैन्य अकादमियों में अलग पहचान दिलाती है।
रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि यहां केवल अधिकारी नहीं गढ़े जाते, बल्कि ऐसे लीडर्स तैयार किए जाते हैं जो सीमाओं से परे मित्रता, सहयोग और पेशेवर उत्कृष्टता की भावना को आगे बढ़ाते हैं। लेसोथो और केन्या से आए इन कैडेटों की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सैन्य प्रशिक्षण केवल कौशल निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्रों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है।
--आईएएनएस
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