पटना, 9 जून (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना में दो कोचिंगों के बीच हुए विवाद के बाद सरकार भी अब कोचिंग संस्थानों पर लगाम कसने की तैयारी में है। सरकार कोचिंग संस्थानों के लिए एक नीति बनाने की पहले ही घोषणा कर चुकी है। इस बीच, बिहार के कोचिंग संस्थानों को अब जिला प्रशासन को पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पूर्ण विवरण भी देना होगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को इससे संबंधित निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं इसकी जानकारी साझा करते हुए सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर लिखा कि राज्य में विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोचिंग संचालन को लेकर शिक्षा विभाग को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी कोचिंग संस्थानों को अपने यहां अध्ययनरत विद्यार्थियों का विवरण संबंधित जिला प्रशासन को उपलब्ध कराना अब अनिवार्य होगा। इसके अलावा, स्कूलों एवं कॉलेजों के लिए निर्धारित शिक्षण समय के दौरान कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, यह व्यवस्था उन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगी जिन्होंने अपनी नियमित स्कूली, महाविद्यालयी शिक्षा पूरी कर ली है। शिक्षा विभाग को इस संबंध में नियमावली तैयार करने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना हमारी प्रतिबद्धता है।
दरअसल, हाल ही में पटना के दो कोचिंग संस्थानों में हुए विवाद का मामला तूल पकड़ चुका है। दोनों कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी कहा था कि कोचिंग संस्थानों में आपस की प्रतिस्पर्धा में एक-दूसरे के साथ तनाव की स्थिति उत्पन्न होने और विधि व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संभावना को रोकने के लिए एक नीति बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि कोचिंग संचालकों के लिए एक नीति बनाई जाएगी और उस नीति के तहत इन पर अंकुश लगाया जाएगा। जब नीति बन जाएगी और उसका उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।