दिव्या स्पंदना (राम्या): कन्नड़ सिनेमा की स्टार, जिन्होंने संसद तक का सफर किया तय

दिव्या स्पंदना (राम्या): कन्नड़ सिनेमा की स्टार, जिन्होंने संसद तक का सफर किया तय

नई दिल्ली, 28 नवंबर (आईएएनएस)। साल 2013 में कर्नाटक के मांड्या के चुनावी मैदान की भीड़ में एक चेहरा सामने आया था, जो राजनीतिक तपस्या से नहीं, बल्कि पर्दे की चमक से आया था। वह थीं राम्या, जिन्हें उनके आधिकारिक नाम दिव्या स्पंदना से भी जाना जाता है।

महज 30 साल की उम्र में, उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल कर लोकसभा की सबसे कम उम्र की सांसदों में से एक बन गईं।

दिव्या स्पंदना का करियर एक रणनीतिक द्वैत पर टिका है। एक ओर 'राम्या' की लोकप्रिय, ग्लैमरस पहचान, जो उन्हें व्यापक जन अपील देती है और दूसरी ओर 'दिव्या स्पंदना' का गंभीर राजनीतिक नाम, जो उन्हें एक डिजिटल रणनीतिकार के रूप में विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद करता है।

दिव्या स्पंदना का जन्म 29 नवंबर, 1982 को बैंगलोर में हुआ था। उनकी मां, रंजीता, खुद कांग्रेस पार्टी की एक वरिष्ठ सदस्य थीं, जिसने उन्हें राज्य की राजनीतिक गतिशीलता की प्रारंभिक समझ दी। ऊटी और चेन्नई में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने 2003 में कन्नड़-भाषा की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'अभि' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म ने कर्नाटक के सिनेमाघरों में 150 दिनों से अधिक का रिकॉर्ड बनाया।

इसके साथ ही, राम्या का 'सैंडलवुड क्वीन' के रूप में अभूतपूर्व उदय हुआ। उनकी लोकप्रियता केवल कन्नड़ तक सीमित नहीं रही, उन्होंने उसी वर्ष तेलुगु फिल्म 'अभिमन्यु' से भी डेब्यू किया। 'एक्सक्यूज मी' (2003) जैसी सफलताओं की एक श्रृंखला ने उन्हें 'कन्नड़ सिनेमा की गोल्डन गर्ल' बना दिया।

उन्होंने अमृतधारे (2005) और तनानाम तनानाम (2006) के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) जीते और 2011 के रोमांटिक ड्रामा संजू वेड्स गीता में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें प्रतिष्ठित कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कार दिलाया।

2012 में, राम्या ने फिल्मों को अलविदा कहकर पूरी तरह से राजनीति को समर्पित होने की घोषणा की और कांग्रेस की युवा शाखा में शामिल हो गईं।

2014 के चुनावी नतीजों के बाद, कांग्रेस पार्टी ने डिजिटल प्रचार में अपनी कमी को पहचाना। मई 2017 में, दिव्या स्पंदना को कांग्रेस सोशल मीडिया सेल का प्रमुख नियुक्त किया गया।

राम्या की रणनीति सिर्फ राजनीतिक हमलों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने सामाजिक सक्रियता के लिए भी डिजिटल मंच का उपयोग किया। 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद, राम्या ने सोशल मीडिया प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका छोड़ दी, जिसने पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद और जवाबदेही को लेकर अटकलों को जन्म दिया।

2019 में राजनीतिक परिदृश्य से हटने और कुछ समय के लिए गुमनामी में रहने के बाद, राम्या ने अगस्त 2022 में फिल्म उद्योग में वापसी की घोषणा की। हालांकि, इस बार वह पर्दे के सामने नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे थीं।

उन्होंने अपने नए लॉन्च किए गए प्रोडक्शन हाउस, 'एप्पल बॉक्स स्टूडियोज,' के माध्यम से निर्माता की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया।

2023 में, एप्पल बॉक्स स्टूडियोज ने समीक्षकों द्वारा प्रशंसित कन्नड़ फिल्म 'स्वाति मुथिना माले हानियेह' का निर्माण किया, जिसने तुरंत महत्वपूर्ण सफलता हासिल की और कई पुरस्कार जीते।

दिव्या स्पंदना की विरासत तीन उच्च-प्रोफाइल क्षेत्रों (प्रशंसित सिनेमा स्टार, निर्वाचित लोकसभा प्रतिनिधि, और राष्ट्रीय राजनीतिक संचारक) में एक साथ प्रासंगिकता प्राप्त करने से परिभाषित होती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीएससी

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