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मुंबई, 7 मार्च (आईएएनस)। ओटीटी के दौर में हर दिन नई-नई कहानियां दर्शकों के सामने आती हैं। कुछ सिर्फ हंसी-मजाक देती हैं, तो कुछ मनोरंजन के साथ गहरा संदेश भी छोड़ जाती हैं। ऐसी ही एक लोकप्रिय कॉमेडी-ड्रामा सीरीज 'दुपईया' अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई थी।
सीरीज को भले ही ओटीटी पर प्रसारित किया गया था लेकिन इसने अपनी मजेदार कहानी कहने के तरीके और हास्य अंदाज से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी थी। सीरीज के जरिए निर्देशक ने दर्शकों के सामने सालों से चली आ रही है दहेज प्रथा को हास्य अंदाज में समझाया था।
शनिवार को सीरीज ने अपनी रिलीज के एक साल पूरे कर लिए हैं। सीरीज की कहानी बिहार के एक काल्पनिक गांव धड़कपुर की है। यह गांव 25 गांव 25 साल से क्राइम-फ्री होता है। साफ-सुथरा, हरा-भरा और शांत, लेकिन कहानी तब मजेदार होती है, जब गांव के शिक्षक बनवारी झा (गजराज राव) अपनी बेटी की शादी के लिए एक मोटरसाइकिल (दुपहिया) खरीदते हैं, लेकिन शादी से पहले ही वह बाइक चोरी हो जाती है, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच जाता है।
सीरीज तब और मजेदार हो जाती है, जब दुल्हन का परिवार और उसका पूर्व प्रेमी मिलकर इस दुपहिया को ढूंढने निकल पड़ते हैं। इस खोज में गांव के लोग, परिवार वाले और कई मजेदार किरदार शामिल हो जाते हैं। पूरी कहानी हंसी-मजाक, छोटे-छोटे झगड़ों और ग्रामीण जीवन की सादगी से भरी है।
निर्देशक ने इस सीरीज के जरिए दर्शकों को हास्य अंदाज में ये समझाया है कि दहेज किसी लड़की के जीवन को सुधारती नहीं है, बल्कि उसकी पहचान को दबाती है और एक ऐसी सोच को बढ़ावा देती है, जो समाज के लिए बेहद खतरनाक है।
दुपईया के अंत में दिखाया गया है कि कैसे एक लड़की दहेज प्रथा के खिलाफ खड़ी होकर शादी तोड़कर अपने लिए खड़ी होती है। सीरीज में गजराज राव, रेणुका शहाणे, स्पर्श श्रीवास्तव, भुवन अरोड़ा, शिवानी रघुवंशी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। निर्देशन और लेखन में भी कमाल दिखाया था, जिसने इसे पंचायत और लापता लेडीज जैसी सीरीज से जोड़कर देखा जाने लगा था।
--आईएएनएस
एनएस/पीयूष