'सुर क्षेत्र' से लेकर 'इंडियन आइडल' तक: सुरों की पहचान में माहिर थीं 'आशा ताई', बतौर जज दिए थे सटीक फीडबैक

मुंबई, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। संगीत जगत की महान हस्ती आशा भोसले का निधन हो गया है। रविवार को 92 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। दरअसल, संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो वक्त के सांचे में ढलने के बजाय, वक्त को अपने सांचे में ढाल लेती हैं। आशा भोसले एक ऐसा ही नाम थीं।

80 से अधिक वर्षों के बेमिसाल करियर और 20 से ज्यादा भाषाओं में अपने सुरों का जादू बिखेरने वाली आशा भोसले ने सिर्फ प्लेबैक सिंगिंग में ही अपना लोहा नहीं मनवाया, बल्कि टीवी की दुनिया में आकर नई पीढ़ी के हुनर को भी तराशने का काम किया था।

एक दौर ऐसा भी आया जब उन्होंने रिकॉर्डिंग स्टूडियो से निकलकर टीवी रियलिटी शोज के 'जज' की कुर्सी संभाली और अपने सटीक मूल्यांकन से दर्शकों और प्रतियोगियों दोनों का दिल जीता।

टेलीविजन पर संगीत आधारित रियलिटी शोज के उभरने के साथ ही मेकर्स को ऐसे दिग्गजों की तलाश थी, जो न सिर्फ गायकी की तकनीकी बारीकियों को समझें, बल्कि जिनका अनुभव प्रतियोगियों के लिए एक 'मास्टरक्लास' साबित हो। इसी कड़ी में आशा भोसले ने कई बड़े शोज में जज के तौर पर काम किया।

सोनी टीवी के सबसे लोकप्रिय सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' के छठे सीजन में आशा भोसले ने बतौर 'सुपर जज' एंट्री ली थी। उनके साथ पैनल में अनु मलिक, सुनिधि चौहान और सलीम मर्चेंट भी थे। आशा भोसले का शो में आना एक बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह प्रतियोगियों में सबसे पहले 'सुर' की पक्की समझ ढूंढेंगी। उनके सटीक फीडबैक और संगीत के प्रति उनकी ईमानदारी ने इस सीजन को बेहद खास बना दिया था।

कलर्स और सहारा वन पर प्रसारित होने वाला सुर क्षेत्र (2012) शो एक ऐतिहासिक संगीत युद्ध था, जिसमें भारत और पाकिस्तान के गायकों के बीच मुकाबला था। इस शो का जूरी पैनल बहुत ही आइकॉनिक था। भारत का प्रतिनिधित्व आशा भोसले कर रही थीं, पाकिस्तान से दिग्गज सूफी गायिका आबिदा परवीन थीं, और बांग्लादेश से रूना लैला बतौर जज शामिल हुई थीं। भारतीय टीम के मेंटर हिमेश रेशमिया और पाकिस्तानी टीम के मेंटर आतिफ असलम थे। आशा ताई ने इस शो में जिस बेबाकी और निडरता से अपने फैसले सुनाए और भारतीय संस्कृति व शास्त्रीय गायन का पक्ष रखा, वह आज भी टीवी इतिहास के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है।

बतौर मुख्य जज के अलावा, आशा भोसले ने जी टीवी के 'सा रे गा मा पा' (कई सीजन्स और लिटिल चैंप्स) और 'डांस इंडिया डांस' जैसे शोज में भी बतौर 'सेलिब्रिटी गेस्ट जज' शिरकत की थी। टीवी पर उनकी उपस्थिति हमेशा एक उत्सव जैसी रही, जहां वह अक्सर अपनी पुरानी यादें, आरडी बर्मन (पंचम दा) के किस्से और संगीत जगत की अनकही कहानियां साझा करती थीं।

आशा भोसले की गायकी की सबसे बड़ी खूबी उनकी 'वर्सैटिलिटी' (विविधता) थी। वह कैबरे से लेकर गजल तक, और रोमांटिक मेलोडी से लेकर क्लासिकल बंदिशों तक, हर रंग में ढल जाती थी। उनके कुछ ऐसे आइकॉनिक और हिट गाने हैं जिन्होंने बॉलीवुड में काफी पॉपुलर रहे।

पॉपुलर गानों में पिया तू अब तो आजा - कारवां (1971), दम मारो दम - हरे रामा हरे कृष्णा (1971), चुरा लिया है तुमने जो दिल को - यादों की बारात (1973), ये मेरा दिल यार का दीवाना - डॉन (1978), इन आंखों की मस्ती के - उमराव जान (1981), मेरा कुछ सामान - इजाजत (1987) शामिल हैं।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

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