'स्कूल बंक कर देखता था फिल्में...', सुभाष घई ने पुरानी यादें ताजा कर बताया कैसे बने निर्देशक

मुंबई, 18 मई (आईएएनएस)। मशहूर निर्देशक सुभाष घई की फिल्मों का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है। सोमवार को निर्देशक ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि उन्हें भारतीय सिनेमा में बेहतरीन और सदाबहार फिल्में बनाने की प्रेरणा कहां से मिली थी।

निर्देशक ने इंस्टाग्राम पर मनपसंद निर्देशकों की तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसके साथ उन्होंने लिखा, "जब कोई फिल्म सिर्फ पसंद की जाए, तो वह हिट फिल्म होती है और जब लोग चर्चा करें, तो वह अच्छी फिल्म होती है और लंबे समय तक याद रहे, तो वह क्लासिक फिल्म बन जाती है।"

निर्देशक ने अपनी जिंदगी के पन्नों को पलटते हुए बताया कि फिल्मों के प्रति उनकी दीवानगी बचपन से ही थी। उन्होंने लिखा, "मैं स्कूल से छिपकर फिल्में देखने जाया करता था। वही फिल्में मेरे लिए भारतीय सिनेमा सीखने का एक आसान तरीका बनीं।"

सुभाष घई ने अपनी पढ़ाई और करियर के सफर का जिक्र करते हुए लिखा, "बाद में 22 साल की उम्र में मैं फिल्म और टेलीविजन इंस्टीय्यूट ऑफ इंडिया पहुंचा, जहां मुझे वर्ल्ड सिनेमा को करीब से समझने का मौका मिला। हालांकि, प्रोफेशनल तौर पर मैंने मुंबई में कमर्शियल सिनेमा में काम करना चुना। मेरे पसंदीदा फिल्म निर्माताओं को दिल से सम्मान।"

सुभाष की पोस्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। उनके प्रशंसक कमेंट सेक्शन पर उनकी सराहना करते हुए तरह-तरह प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

सुभाष घई फिल्म इंडस्ट्री के नामी निर्देशकों में आते हैं, जिन्होंने शानदार फिल्में देने के साथ-साथ नए कलाकारों को भी कई मौके दिए हैं। उनकी चर्चित फिल्मों में ‘कालीचरण’, ‘विश्वनाथ’, ‘कर्ज’, विधाता’, ‘हीरो’, मेरी जंग’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, सौदागर’, ‘खलनायक’ ‘परदेस’, ताल’, ‘यादें’ शामिल हैं।

सुभाष घई इस समय अपने 'व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल' नाम से एक एक्टिंग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं। ये स्कूल दुनिया के टॉप 10 फिल्म स्कूलों में से एक माना जाता है। इस एक्टिंग स्कूल में वे नए कलाकारों को अभिनय और फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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