Gudi Padwa Celebration : गुड़ी पड़वा पर इंदिरा कृष्णा और शरद केलकर का संदेश, 'परंपराएं ही हमारी ताकत, जड़ों से जुड़े रहना जरूरी'

गुड़ी पड़वा 2026: कलाकारों ने परंपरा, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच पर जोर दिया।
गुड़ी पड़वा पर इंदिरा कृष्णा और शरद केलकर का संदेश, 'परंपराएं ही हमारी ताकत, जड़ों से जुड़े रहना जरूरी'

नई दिल्ली: भारत में हर त्योहार अपने साथ एक खास संदेश लेकर आता है, जो हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। खासकर गुड़ी पड़वा जैसे पर्व को नई शुरुआत, उम्मीद और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। इसी कड़ी में इंदिरा कृष्णन और शरद केलकर ने गुड़ी पड़वा के मौके पर आईएएनएस संग बातचीत में अपने विचार साझा किए। दोनों कलाकारों ने परंपराओं की अहमियत, नई शुरुआत और जीवन में आगे बढ़ने की सोच पर जोर दिया है।

टीवी शो 'गंगा माई की बेटियां' में दुर्गावती का किरदार निभा रहीं इंदिरा कृष्णा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारतीय परंपराओं में हर त्योहार में गहरा अर्थ छिपा होता है। यह हमारी ताकत है। गुड़ी पड़वा पर घर के बाहर लगाई जाने वाली 'गुड़ी' शक्ति, साहस और सकारात्मकता का प्रतीक होती है, जो यह याद दिलाती है कि हर कठिन परिस्थिति के बाद एक नई शुरुआत संभव है।"

इंदिरा कृष्णा ने कहा, ''यह त्योहार मेरे अपने जीवन की यात्रा को देखने और समझने का मौका देता है, जहां हर चुनौती ने मुझे और मजबूत बनाया है। मेरे लिए यह दिन आत्मविश्वास, विश्वास और कृतज्ञता को बढ़ाने का प्रतीक है। जैसे-जैसे इंसान जीवन में आगे बढ़ता है, उसे अपने अनुभवों से सीखते हुए हर नए दिन को एक नए अवसर की तरह अपनाना चाहिए।''

इस खास मौके पर उन्होंने सभी के लिए शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि गुड़ी पड़वा का त्योहार यह सिखाता है कि हमें हर हाल में उम्मीद बनाए रखनी चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

वहीं, टीवी शो 'तुम से तुम तक' में नजर आ रहे शरद केलकर ने भी गुड़ी पड़वा को लेकर आईएएनएस संग अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, ''मेरे लिए गुड़ी पड़वा केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं है, बल्कि यह नई शुरुआत, उम्मीद और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भले ही मैं काम में काफी व्यस्त रहता हूं, लेकिन हर साल इस त्योहार को मनाने के लिए समय जरूर निकालता हूं, क्योंकि इससे मुझे अपने परिवार और जड़ों से जुड़ने का मौका मिलता है। परंपराएं हमें यह याद दिलाती हैं कि हम कहां से आए हैं और हमने अपने जीवन में कितना सफर तय किया है।''

शरद केलकर ने आगे कहा, ''आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं, लेकिन ऐसे त्योहार हमें एक बार फिर अपनों के करीब लाते हैं और हमें एक सुकून का एहसास देते हैं। गुड़ी पड़वा हमें यह सिखाता है कि हमें हर नई शुरुआत को सकारात्मक सोच और दृढ़ निश्चय के साथ अपनाना चाहिए।''

उन्होंने कहा, ''इन मूल्यों और परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है, ताकि वे भी अपनी संस्कृति को समझ सकें और उससे जुड़े रहें। मेरे लिए यह त्योहार न केवल खुशियों का मौका है, बल्कि जीवन में स्थिरता बनाए रखने का एक जरिया भी है।''

'गंगा माई की बेटियां' और 'तुम से तुम तक' शो जी टीवी पर प्रसारित होते हैं।

--आईएएनएस

 

 

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