'ग्लोरी' में दिखेगी हिंसा के पीछे छिपी सच्चाई, करण अंशुमान ने खोले सीरीज के कई राज

मुंबई, 5 मई (आईएएनएस)। ओटीटी की दुनिया में क्रिएटर करण अंशुमान ने हमेशा ऐसी कहानियां पेश की हैं, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज और इंसान की सोच से जुड़े सवाल भी उठाती हैं।

उनकी बनाई सीरीज 'इनसाइड एज' और 'मिर्जापुर' को दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब करण अपने नए प्रोजेक्ट 'ग्लोरी' के साथ एक बार फिर चर्चा में हैं, जिसमें वह हिंसा, ताकत और इंसानी स्वभाव के गहरे पहलुओं को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।

करण अंशुमान ने नई सीरीज 'ग्लोरी' के बारे में बात करते हुए कहा, ''यह सिर्फ एक साधारण कहानी नहीं है, बल्कि इसमें ऐसे सवाल उठाए गए हैं, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेंगे। इसमें बॉक्सिंग को हमने एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया है, जिसके जरिए इंसान के भीतर छिपी हिंसा और उसके असर को दिखाया गया है।''

करण ने 'अल्फा' सोच पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, ''असल जिंदगी में 'अल्फा' वही होता है, जो अपने समूह की रक्षा करता है और उनकी जिम्मेदारी उठाता है। ताकत का मतलब सिर्फ हिंसा नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारी और समझदारी भी उतनी ही जरूरी है। इंसान को इससे ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है।''

करण ने आगे कहा, '''ग्लोरी' की कहानी दर्शकों को एक अलग अनुभव देगी। जब कोई व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से हिंसा करता है, तो उसका दिमाग भी उसी दिशा में बदलने लगता है। हिंसा सिर्फ एक पल की घटना नहीं होती, बल्कि यह इंसान के स्वभाव को भी प्रभावित करती है। यही सोच इस सीरीज का मुख्य आधार है।''

उन्होंने कहा, ''इस सीरीज में बॉक्सिंग सिर्फ एक खेल के रूप में नहीं दिखाई गई है, बल्कि इसे एक प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि इंसान के अंदर चल रही भावनाएं और संघर्ष किस तरह बाहर आते हैं।''

अगर करण अंशुमान के करियर की बात करें, तो उन्होंने 2015 में फिल्म 'बंगिस्तान' से निर्देशन की शुरुआत की थी। इसके बाद 2017 में उन्होंने 'इनसाइड एज' बनाई, जो एक स्पोर्ट्स ड्रामा सीरीज थी और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। इसके अलावा, उन्होंने 'मिर्जापुर' जैसी चर्चित सीरीज में शो-रनर के रूप में भी काम किया।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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