मुंबई: सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ समाज में बदलाव लाने का मजबूत जरिया भी है। ऐसी फिल्में जो इंसान की सोच, व्यवहार और जीवन के नजरिए को बदलने की क्षमता रखती हैं, उनका असर लंबे समय तक बना रहता है। इसी सोच के साथ अब एक सराहनीय पहल सामने आई है, जिसमें एक चर्चित फिल्म को जेलों में बंद कैदियों को दिखाने की तैयारी की जा रही है, ताकि उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।
यह फिल्म है '23', जिसे निर्देशक राज राचकोंडा ने बनाया है। इस पहल की जानकारी तेलंगाना की जेल विभाग की महानिदेशक सौम्या मिश्रा ने एक सम्मान समारोह के दौरान दी। उन्होंने कहा, ''यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के एक महत्वपूर्ण पहलू और अपराधियों के सुधार को बेहद जिम्मेदारी के साथ दिखाया गया है। फिल्म को जिस गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ पेश किया गया है, वह काबिल-ए-तारीफ है।''
सौम्या मिश्रा ने खुद फिल्म देखने के बाद अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा, ''फिल्म ने मुझे काफी प्रभावित किया और इसमें अपराधियों के बदलाव को बहुत ही प्रभावी तरीके से दिखाया गया है। अब तक फिल्मों में जेल की जिंदगी को इतनी सच्चाई और गहराई से नहीं दिखाया गया था। इस फिल्म ने उस कमी को पूरा किया है और दर्शकों को एक नया नजरिया दिया है।''
उन्होंने इस फिल्म की तुलना मशहूर हॉलीवुड फिल्म 'द शॉशैंक रिडेम्पशन' से भी की, जिसे दुनिया की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। सौम्या मिश्रा ने कहा, '''23' भी उसी स्तर की एक गंभीर और प्रेरणादायक फिल्म है। अगर इस फिल्म को देखने के बाद कैदियों के विचारों में थोड़ा भी बदलाव आता है, तो यह अपने आप में बड़ी सफलता होगी। इसी उद्देश्य से हमने जेलों में इस फिल्म की स्क्रीनिंग कराने का फैसला लिया है।''
फिल्म '23' की कहानी अपराध और सुधार के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे कुछ लोग गलत रास्ते पर चले जाते हैं, लेकिन सही मार्गदर्शन और परिस्थितियों के जरिए उनके जीवन में बदलाव लाया जा सकता है। यह फिल्म पिछले साल रिलीज हुई थी और इसे दर्शकों के साथ-साथ फिल्म समीक्षकों से भी जबरदस्त सराहना मिली थी।
--आईएएनएस