'फिल्म लीक होना मौत जैसे दर्द के बराबर', 'जन नायकन' विवाद पर विग्नेश शिवन का बड़ा बयान

चेन्नई, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडस्ट्री में एक फिल्म को बनाने में कई बार वर्षों की मेहनत लगती है। एक-एक सीन, हर डायलॉग, हर फ्रेम को बनाने में पूरी टीम दिन-रात एक करती है। ऐसे में जब कोई फिल्म रिलीज से पहले या रिलीज के दौरान लीक हो जाती है, तो इसका सबसे बड़ा असर टीम पर पड़ता है। हाल ही में इसी मुद्दे पर निर्देशक विग्नेश शिवन ने खुलकर अपनी बात रखी और फिल्म 'जन नायकन' के निर्देशक एच विनोथ के प्रति अपना समर्थन जताया।

विग्नेश शिवन अपनी हाल ही में रिलीज फिल्म 'लव इंश्योरेंस कंपनी' (एलआईके) के थैंक्स गिविंग मीट में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के मौजूदा हालात पर चिंता जताई और खासतौर पर फिल्मों के लीक होने की समस्या को लेकर गंभीर बात कही। उन्होंने कहा, ''आज के समय में डायरेक्टर्स के लिए हालात काफी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। एक फिल्म का लीक होना उनके लिए बहुत बड़ा झटका होता है।''

उन्होंने कहा, ''जब कोई फिल्म लीक होती है, तो उसका दर्द सबसे ज्यादा उस निर्देशक को महसूस होता है, जिसने उसे बनाने में दिन-रात मेहनत की होती है। मैं अपने दोस्त एच विनोथ के लिए दुखी हूं और अंदाजा लगा सकता हूं कि उनका दर्द कितना गहरा है। यह मौत के दर्द के बराबर है। यह एक ऐसा एहसास है, जिसे सिर्फ एक निर्देशक ही पूरी तरह समझ सकता है, क्योंकि वही जानता है कि उसने उस फिल्म के लिए कितने सपने देखे थे और कितनी मेहनत की थी।''

विग्नेश शिवन ने कहा, ''एक फिल्म को बनाने की प्रक्रिया बहुत लंबी और कठिन होती है। हर दिन सेट पर जाकर हर छोटे से छोटे सीन को सही तरीके से शूट करना, हर फ्रेम को बेहतर बनाना, यह सब आसान नहीं होता। ऐसे में जब फिल्म उम्मीद के मुताबिक रिलीज नहीं हो पाती या बीच में ही लीक हो जाती है, तो यह पूरी टीम के लिए निराशाजनक होता है।''

उन्होंने अपनी फिल्म 'लव इंश्योरेंस कंपनी' के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "मेरे लिए इस फिल्म का रिलीज होना ही एक बड़ी जीत है। मैंने इस फिल्म के लिए अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलकर काम किया। यह फिल्म साल 2040 की कहानी पर आधारित है, इसलिए इसे बनाना आसान नहीं था। हर सीन को शूट करने में तकनीकी और रचनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां थीं। इस फिल्म के हर एक सीन पर कड़ी मेहनत करनी पड़ी।"

विग्नेश शिवन ने कहा, ''जब इतनी मेहनत के बाद फिल्म आखिरकार रिलीज होती है और दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो यह अनुभव संतोष देने वाला होता है। एक लेखक और निर्देशक के तौर पर जब आपकी कोशिशें लोगों को पसंद आती हैं, तो आपका आत्मविश्वास और बढ़ जाता है।''

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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