मुंबई: आज के दौर में फिल्मों की सफलता सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है बल्कि सोशल मीडिया पर बनने वाले मीम्स, ट्रेंड्स और दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी बेहद अहम होती हैं। किसी भी फिल्म का इंटरनेट पर छा जाना इस बात का संकेत होता है कि वह दर्शकों के दिलों तक पहुंच चुकी है।
इन दिनों 'धुरंधर' कुछ ऐसा ही कमाल कर रही है। एक तरफ जहां, यह फिल्म कमाई के मामले में रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ यह सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त ट्रेंड कर रही है। फिल्म के डायलॉग्स, किरदार और सीन मीम्स के जरिए लोगों के बीच चर्चा में बने हुए हैं। इसी बीच फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले अभिनेता मानव गोहिल ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में इस ट्रेंड और बदलते सिनेमा को लेकर अपनी राय रखी।
'धुरंधर' में आईबी के डिप्टी डायरेक्टर सुशांत बंसल का किरदार निभा रहे मानव गोहिल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "धुरंधर आज के समय के सिनेमा का एक विकसित रूप है। यह फिल्म दर्शकों को एक मजबूत कहानी देती है। अब दर्शक पहले से ज्यादा समझदार हो गए हैं और वे उन फिल्मों को पसंद करते हैं, जो सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं बनाई जातीं बल्कि जिनमें सच्चाई और दमदार कंटेंट होता है।"
जब आईएएनएस ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने 'धुरंधर' को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं, खासकर सोशल मीडिया पर बन रहे मीम्स और ट्रेंड्स देखे हैं, तो उन्होंने कहा, ''मैंने फिल्म से जुड़े कई मीम्स और ट्रेंड्स देखे हैं और मुझे लगता है कि यह एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। अब सिनेमा सिर्फ लोकल नहीं रहा, बल्कि दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहा है और ऐसी फिल्में इसी बदलाव को दर्शाती हैं।''
उन्होंने कहा, ''आज के दर्शक पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक हैं। वे फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं देखते बल्कि उसमें छिपे संदेश और उसकी गुणवत्ता को भी समझते हैं। यही वजह है कि अब सिर्फ बड़े बजट या स्टार पावर से फिल्में सफल नहीं होतीं, बल्कि मजबूत कहानी और प्रस्तुति ही फिल्म को आगे बढ़ाती है।''
मानव गोहिल ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में भी इसी तरह की फिल्मों का निर्माण होता रहेगा, जो दर्शकों को कुछ नया और बेहतर देखने का मौका देंगी। अब फिल्म बनाने में कोई शॉर्टकट नहीं चलता और न ही सिर्फ दिखावे से काम चलता है। दर्शकों को असली कंटेंट चाहिए, जो उन्हें दिल से जोड़ सके।''
उन्होंने कहा, "सिनेमा का असली मकसद लोगों का मनोरंजन करना है, लेकिन यह मनोरंजन ऐसा होना चाहिए जो ईमानदारी के साथ पेश किया जाए। 'धुरंधर' इसी सोच का बड़ा उदाहरण है, जहां कहानी, अभिनय और प्रस्तुति मिलकर एक मजबूत अनुभव तैयार करते हैं।"
--आईएएनएस
