आशा भोसले ने लता मंगेशकर की छत्रछाया में रहकर बनाई खुद की अलग पहचान : समीर अंजान

नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं, जो पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में बसी रहती हैं। ऐसी ही एक आवाज थीं गायिका आशा भोसले। उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है। मशहूर गीतकार समीर अंजान ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही आईएएनएस से बात करते हुए उनके व्यक्तित्व के बारे में बताया।

आईएएनएस से बात करते हुए समीर अंजान ने कहा, ''मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आशा जी की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को इस कठिन समय से उबरने की ताकत मिले। उनका जाना ऐसा है, जैसे 'आवाज की एक सदी' खत्म हो गई हो। वह कोई साधारण गायिका नहीं थीं, बल्कि वह एक ऐसी संस्था थीं, जिनका काम अतुलनीय और बेमिसाल है। उन्होंने अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, उसे दोहराना किसी के लिए आसान नहीं है।''

उन्होंने कहा, ''दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ एक बार जन्म लेते हैं और अपनी कला से इतिहास रच देते हैं। आशा जी भी उन्हीं में से एक थीं। उनके गाए गीतों में इतनी विविधता थी कि शायद ही कोई ऐसा संगीत का रूप हो, जिसे उन्होंने न छुआ हो। चाहे वह हिप-हॉप हो, डिस्को हो, रोमांटिक गीत हो या गजल, हर शैली में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई।''

समीर अंजान ने कहा, ''मुझे लगता है कि महिला सिंगर में सबसे ज्यादा गाना गाने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम होगा। उन्होंने हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी जैसी कई भाषाओं में गाकर अपनी अलग छाप छोड़ी।''

समीर अंजान ने आशा जी के संघर्षों को भी याद किया। उन्होंने बताया, ''उन्होंने अपने जीवन में गरीबी और कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन जब उन्हें सफलता मिली, तो उन्होंने उसे पूरी शिद्दत से जिया और आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचीं। आशा जी ने अपने दम पर जो मुकाम बनाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल है। भले ही आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज हमेशा जिंदा रहेगी और लोग सदियों तक उनके गीत सुनते रहेंगे।''

समीर अंजान ने कहा, ''अगर कोई नई पीढ़ी का कलाकार सिर्फ आशा जी के गानों को ध्यान से सुन ले और उनसे सीख ले, तो मैं गारंटी देता हूं कि उसकी सफलता तय है। आशा जी के गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीख और प्रेरणा का स्रोत भी हैं। उनकी गायकी में जो भाव, ऊर्जा और समर्पण था, वह आज भी कलाकारों के लिए एक मार्गदर्शन की तरह है।''

उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले के रिश्ते पर भी बात की। उन्होंने कहा, ''लता मंगेशकर जैसी महान गायिका की बहन होने के बावजूद, उनकी छत्रछाया में रहकर आशा जी ने अपनी अलग पहचान बनाई, जो बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने अपनी अलग शैली तैयार की और संगीत जगत में खुद के लिए एक खास जगह बनाई। दोनों बहनों के बीच गहरा प्यार था। परिवार में छोटे-मोटे मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनके रिश्ते खराब थे। उन्होंने हमेशा एक-दूसरे का सम्मान किया।''

समीर अंजान ने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया, ''कुछ समय पहले जब मैं आशा जी से मिला था, तब मुझे बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगा कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। उनके अंदर वही ऊर्जा, वही उत्साह और वही जज्बा था। जब आशा जी माइक के सामने खड़ी होती थीं, तो ऐसा लगता था जैसे कोई योद्धा मैदान में उतर रहा हो। वह हर बार अपना सौ प्रतिशत देती थीं।''

उन्होंने एक पुरानी याद साझा करते हुए बताया, ''एक बार मैं उनके घर गया था और दरवाजे के बाहर खड़े होकर अंदर से उनकी रियाज की आवाज सुन रहा था। उस समय उनकी उम्र 87 के करीब होगी, फिर भी वह नियमित अभ्यास कर रही थीं। उनके लिए उनका काम ही सबसे ऊपर था और वह उसे पूजा की तरह मानती थीं।''

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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