वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई लिक्विडिटी मैनेजमेंट में रहेगा सक्रिय : गवर्नर संजय मल्होत्रा

नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी उचित जगह बनाने के प्रयासों के बीच, मौद्रिक नीति से परे विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत नीतिगत ढांचे इसकी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि हम आगामी डेटा और विकास-मुद्रास्फीति गतिशीलता के विकास के आधार पर एक सुविधाजनक मौद्रिक नीति प्रदान करने में सक्रिय बने रहेंगे।

उन्होंने आरबीआई के लेटेस्ट बुलेटिन में कहा कि हमेशा की तरह, हमारे पास एक स्पष्ट, सुसंगत और विश्वसनीय संचार होगा, जो इस कार्य के लिए आवश्यक कार्रवाइयों द्वारा समर्थित होगा।

उन्होंने कहा, "आगे बढ़ते हुए, रिजर्व बैंक अपने लिक्विडिटी मैनेजमेंट में चुस्त और लचीला बना रहेगा। हम बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने का प्रयास करेंगे ताकि अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताएं पूरी हो सकें और मुद्रा बाजारों और ऋण बाजारों में ट्रांसमिशन सुचारू रहे।"

अनुकूल वर्षा और तापमान की स्थिति खरीफ कृषि मौसम के लिए शुभ संकेत हैं। वास्तविक ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ग्रामीण मांग को बढ़ावा दे सकती है।

आरबीआई बुलेटिन में कहा गया है, "सुगम वित्तीय स्थिति, ब्याज दरों में कटौती का निरंतर प्रसार, सहायक राजकोषीय उपायों और बढ़ते घरेलू आशावाद के साथ, समग्र मांग को बनाए रखने के लिए माहौल अनुकूल है। दूसरी ओर, भारत-अमेरिका व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं लगातार नकारात्मक जोखिम पैदा कर रही हैं।"

निकट भविष्य के लिए मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान पहले के अनुमान से अधिक अनुकूल हो गया है। अनुकूल आधार प्रभावों द्वारा समर्थित खाद्य कीमतों के दबाव में कमी से प्रेरित मुख्य मुद्रास्फीति, वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में धीरे-धीरे बढ़ने से पहले, दूसरी तिमाही में 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे आने की संभावना है।

रिजर्व बैंक बुलेटिन में जोर देकर कहा गया है, "कुल मिलाकर, इस वर्ष औसत मुख्य मुद्रास्फीति लक्ष्य से काफी नीचे रहने की उम्मीद है। आगे चलकर, मौद्रिक नीति आने वाले आंकड़ों और विकसित हो रहे घरेलू विकास-मुद्रास्फीति गतिशीलता पर कड़ी नजर रखेगी ताकि उचित मौद्रिक नीति मार्ग तैयार किया जा सके।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय स्थितियां अनुकूल और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के लिए सहायक बनी रहीं। इसमें आगे कहा गया है कि एसएंडपी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार, भविष्य में पूंजी प्रवाह और सॉवरेन यील्ड के लिए अच्छा संकेत है।

--आईएएनएस

एसकेटी/

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