Maritime India Project : गुजरात के वडिनार में 1,570 करोड़ रुपए की शिप रिपेयर सुविधा को कैबिनेट ने दी मंजूरी

वडिनार में अत्याधुनिक शिप रिपेयर सुविधा को मंजूरी, बढ़ेगी रोजगार और क्षमता
गुजरात के वडिनार में 1,570 करोड़ रुपए की शिप रिपेयर सुविधा को कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को गुजरात के वडिनार में अत्याधुनिक जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित करने के लिए 1,570 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह कदम देश के जहाज मरम्मत क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड मिलकर लागू करेंगे।

सीसीईए के बाद जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना ब्राउनफील्ड मॉडल पर विकसित की जाएगी, जिसमें 650 मीटर लंबी जेट्टी, दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक, वर्कशॉप और अन्य समुद्री ढांचा शामिल होगा। वडिनार की गहराई, प्रमुख समुद्री मार्गों से जुड़ाव और मुंद्रा व कांडला जैसे बंदरगाहों के पास होने के कारण यह स्थान जहाजों की मरम्मत के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है, खासकर बड़े और विदेशी जहाजों के लिए।

यह परियोजना कौशल विकास के नए अवसर पैदा करेगी और आसपास के क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी बढ़ाएगी। साथ ही, इससे छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) और समुद्री सहायक सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

साथ ही बयान में यह भी कहा गया है कि वडिनार शिप रिपेयर सुविधा भारत में जहाज मरम्मत की एक बड़ी कमी को दूर करेगी, क्योंकि फिलहाल देश में 230 मीटर से बड़े जहाजों की मरम्मत के लिए पर्याप्त क्षमता नहीं है। इस नई सुविधा में 300 मीटर तक के जहाजों की मरम्मत संभव होगी।

इससे बड़े जहाजों की मरम्मत देश में ही हो सकेगी, जिससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।

पश्चिमी तट पर मरम्मत की बेहतर सुविधा मिलने से भारतीय बंदरगाहों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी और जहाजों के टर्नअराउंड टाइम में सुधार होगा।

बयान के मुताबिक, इस परियोजना से लगभग 290 प्रत्यक्ष और 1,100 के करीब अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जो जहाज मरम्मत, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित उद्योगों में काम करेंगे।

बयान में कहा गया है कि यह पहल क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देगी और देश के दीर्घकालिक समुद्री लक्ष्यों, जैसे 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047', को हासिल करने में मदद करेगी।

--आईएएनएस

 

 

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