उत्पाद शुल्क में कटौती से ईंधन की कीमतों में वृद्धि 4 प्रतिशत तक सीमित

नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती और तेल कंपनियों को आयातित कच्चे तेल की लागत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होने के कारण हुए नुकसान की भरपाई करने के निर्देश देकर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल पर 24,500 करोड़ रुपए की कम वसूली की भरपाई करके कीमतों को स्थिर रखा, जिसके बाद दोनों ईंधनों की कीमतों में दो किस्तों में 3.91 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी के कारण राजस्व हानि के रूप में 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि तेल कंपनियों को इन दोनों ईंधनों पर 24,500 करोड़ रुपए और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमत स्थिर रखने पर 40,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

भारत की तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो चरणों में क्रमशः 3 रुपए और 91 पैसे की वृद्धि की, जो कुल मिलाकर 3.91 रुपए प्रति लीटर है।

पेट्रोल और डीजल की कीमत में केंद्रीय उत्पाद शुल्क सभी राज्यों में समान है।

प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) के कारण पेट्रोल पंप की कीमतों में अंतर होता है।

सबसे अधिक पेट्रोल पंप मूल्य वाले राज्यों में तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं, जबकि सबसे कम कीमत वाले राज्यों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गोवा और असम शामिल हैं।

इंडियन ऑयल के एक अधिकारी ने बताया कि 3.91 रुपए की यह वृद्धि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा 76 दिनों तक पूरी लागत वहन करने के बाद लागू की गई है।

इसके विपरीत, बाकी दुनिया कच्चे तेल की लागत में हुई वृद्धि को समायोजित करने के लिए दोनों ईंधनों की खुदरा कीमतों में 10 से 90 प्रतिशत तक की वृद्धि कर रही है।

म्यांमार, मलेशिया, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोल की कीमतें युद्ध-पूर्व कीमतों के आधे से अधिक बढ़ गई हैं, जबकि डीजल की कीमतें वैश्विक व्यापार और माल ढुलाई से घनिष्ठ संबंध के कारण और भी तेजी से बढ़ी हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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