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नई दिल्ली, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान की आबादी का लगभग आधा हिस्सा महिलाएं हैं, लेकिन काम करने की उम्र वाली महिलाओं में से सिर्फ हर चार में से एक ही काम करती है, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा पांच में से लगभग चार का है। यह जानकारी कराची स्थित द न्यूज इंटरनेशनल अखबार में प्रकाशित एक लेख में दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जो महिलाएं काम करती भी हैं, उनमें से ज्यादातर कृषि क्षेत्र में हैं, जबकि 15 प्रतिशत से भी कम महिलाएं औपचारिक नौकरी में हैं। बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी सिर्फ 3.6 प्रतिशत है, जो दिखाता है कि वे देश के औद्योगिक विकास से काफी हद तक बाहर हैं।
ये आंकड़े एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं। एक तरफ उद्योग नए उपकरण और तकनीक अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाएं इन नए अवसरों से दूर हैं। यह सिर्फ बराबरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे देश की उत्पादकता, नवाचार और प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होती है।
पाकिस्तान में महिलाओं की औद्योगिक क्षेत्र में भागीदारी कई पुरानी समस्याओं के कारण सीमित है। इनमें शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण की कमी, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले व्यवसायों के लिए वित्त तक सीमित पहुंच और कार्यस्थलों पर सुरक्षा, लचीलापन, चाइल्डकेयर और उत्पीड़न से सुरक्षा की कमी शामिल है।
इन समस्याओं को सामाजिक मान्यताएं और भी बढ़ा देती हैं, जो महिलाओं की आवाजाही को सीमित करती हैं और उन्हें घर के बाहर काम करने से हतोत्साहित करती हैं। इससे कई महिलाएं अनौपचारिक, कम कौशल वाले या घर से जुड़े कामों तक सीमित रह जाती हैं या फिर काम ही नहीं कर पातीं।
इसके अलावा, बिना भुगतान वाले घरेलू कामों का ज्यादा बोझ, स्वास्थ्य और जनसंख्या से जुड़े दबाव भी महिलाओं की काम करने और लंबे समय तक नौकरी में बने रहने की क्षमता को प्रभावित करते हैं।
महिलाओं की आर्थिक भागीदारी सिर्फ समानता का सवाल नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के औद्योगिक भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
अगर महिलाओं की पूरी भागीदारी नहीं बढ़ती, तो आर्थिक लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, अगर कामकाजी भागीदारी में लैंगिक अंतर कम हो जाए, तो पाकिस्तान की जीडीपी 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जबकि विश्व बैंक के अनुसार इससे 75 से 85 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर महिलाओं की भागीदारी में सिर्फ 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाए, तो देश की सालाना आर्थिक वृद्धि दर में 1.5 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है, जो समावेशिता की ताकत को दर्शाता है।
--आईएएनएस
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