निर्यात में वृद्धि और सेवाओं के अधिशेष के चलते भारत का व्यापार घाटा कम हुआ: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति मार्च 2026 में मजबूत बनी रही, क्योंकि सामान (गुड्स) का व्यापार घाटा घटकर 21 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट मुख्य रूप से कीमती धातुओं के आयात में तेज कमी और निर्यात में सुधार के कारण आई। वहीं, मजबूत सर्विस सेक्टर का अधिशेष (सरप्लस) लगातार इस घाटे को संतुलित करने में मदद करता रहा। गुरुवार को जारी एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के दौरान भारत का कुल आयात लगभग 6 प्रतिशत घटकर 59.6 अरब डॉलर रह गया, जबकि कुल निर्यात 6 प्रतिशत बढ़कर 38.9 अरब डॉलर पहुंच गया। इसी दौरान नेट सर्विस एक्सपोर्ट बढ़कर 18.2 अरब डॉलर हो गया और पूरे वित्त वर्ष 2026 में इसमें 13 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि देखी गई।

ध्यान देने वाली बात यह है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद तेल आयात में करीब 6 प्रतिशत की मासिक गिरावट आई। इसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से आयात की मात्रा में 35-40 प्रतिशत की गिरावट माना जा रहा है। वहीं वित्त वर्ष 2026 में कुल निर्यात में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसमें अमेरिका के टैरिफ के असर को नए बाजारों में निर्यात बढ़ाकर संतुलित किया गया।

गुड्स ट्रेड डेफिसिट में कमी का बड़ा कारण सोने के आयात में 59 प्रतिशत और चांदी के आयात में 63 प्रतिशत की गिरावट रहा।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण कच्चे तेल के आयात की मात्रा में 35-40 प्रतिशत तक गिरावट आई। इसके विपरीत, तेल निर्यात लगभग 51 प्रतिशत बढ़कर 5.2 अरब डॉलर हो गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

मध्य पूर्व में तनाव के कारण सऊदी अरब और यूएई को निर्यात में क्रमशः 44 प्रतिशत और 60 प्रतिशत की गिरावट आई। इसका असर रत्न और आभूषण निर्यात पर भी पड़ा, जो लगभग 22 प्रतिशत घट गया।

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए अनुमान लगाया गया है कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी का करीब 1.7 प्रतिशत रह सकता है और भुगतान संतुलन (बीओपी) में 35 अरब डॉलर से अधिक की कमी हो सकती है।

साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में सर्विस निर्यात मजबूत बना रहा, जिसमें ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का बड़ा योगदान रहा। हालांकि, अगर मध्य पूर्व संकट लंबा चलता है, तो वित्त वर्ष 2027 में वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण इस सेक्टर पर दबाव आ सकता है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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