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नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश वर्ष 2025 में तीव्र खाद्य असुरक्षा (एक्यूट फूड इनसिक्योरिटी) से सबसे ज्यादा प्रभावित दुनिया के 10 देशों में शामिल रहा। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 1.6 करोड़ नागरिकों को खाद्य संकट के उच्च स्तर का सामना करना पड़ा और 2026 में भी हालात में सुधार की संभावना कम है।
डेली स्टार द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की ‘ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस’ का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन 10 देशों की स्थिति 2026 में भी संघर्ष, जलवायु आपदाओं, आर्थिक अस्थिरता और मध्य पूर्व संकट से जुड़ी सप्लाई चेन बाधाओं के कारण बेहतर होने की उम्मीद नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में पिछले वर्ष तीव्र खाद्य असुरक्षा झेलने वाले 26.6 करोड़ लोगों में से लगभग दो-तिहाई लोग इन्हीं 10 देशों में थे।
इस सूची में अफगानिस्तान, म्यांमार, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कांगो गणराज्य, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे गरीब आधे लोग पांच देशों में रहते हैं, जिनमें बांग्लादेश, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और नाइजीरिया लंबे समय से खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। लगातार आर्थिक कमजोरी घरेलू और राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की सहनशीलता को कम कर रही है।
संघर्ष को गंभीर भूख का सबसे बड़ा कारण बताया गया है, जिसने प्रभावित लोगों में से आधे को संकट में धकेला। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने राहत सहायता में निवेश बढ़ाने और संघर्ष समाप्त करने की अपील की है।
हालांकि, बांग्लादेश के लिए कुछ राहत की बात यह रही कि 2025 में तीव्र खाद्य असुरक्षा झेलने वालों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत कम हुई।
रिपोर्ट में बांग्लादेश के दो जिलों में जबरन विस्थापित म्यांमार नागरिकों की बिगड़ती स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। रोहिंग्या शरणार्थियों की नई तादाद, बाढ़ और मानवीय सहायता में कटौती से हालात और खराब हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 32 देशों में 3.9 करोड़ से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा के आपात स्तर का सामना कर रहे हैं, जबकि विनाशकारी भूख झेलने वालों की संख्या 2016 के बाद नौ गुना बढ़ गई है।
साथ ही, वर्ष 2025 में लगभग 3.55 करोड़ बच्चे तीव्र कुपोषण का शिकार रहे, जिनमें करीब 1 करोड़ बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित थे।
तीव्र खाद्य असुरक्षा का मतलब है कि भोजन की उपलब्धता, पहुंच, उपयोग या स्थिरता जैसे एक या अधिक पहलू इतने प्रभावित हो जाएं कि लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाए।
--आईएएनएस
डीएससी